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Arvind Kejriwal: शराब नीति में राहत के बाद अब ‘फांसी घर’ की बारी, केजरीवाल ने रखी लाइव स्ट्रीमिंग की शर्त


Delhi

oi-Kumari Sunidhi Raj

Arvind Kejriwal Phansi Ghar Row: दिल्ली की सियासत में ‘फांसी घर’ को लेकर मचा घमासान अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शराब नीति मामले में अदालत से बड़ी राहत मिलने के बाद, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं।

समिति ने केजरीवाल के साथ-साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़लान को भी तलब किया है। यह मामला विधानसभा परिसर में निर्मित एक कमरे की ऐतिहासिक प्रमाणिकता से जुड़ा है, जिसे आप सरकार ने ‘फांसी घर’ के रूप में पेश किया था, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार इसे ‘टिफिन रूम’ बता रही है।

Phansi Ghar Row Arvind Kejriwal

6 मार्च को होगी पेशी, केजरीवाल ने रखी बड़ी शर्त

अरविंद केजरीवाल ने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वह 6 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजे समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे। हालांकि, अपनी उपस्थिति की पुष्टि करने के साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण मांग भी सामने रख दी है। केजरीवाल ने पारदर्शिता का हवाला देते हुए आग्रह किया है कि समिति की पूरी कार्यवाही का सीधा प्रसारण (Live Streaming) किया जाए।

केजरीवाल ने अपने पत्र में दिल्ली की वर्तमान स्थिति पर तंज कसते हुए लिखा, “जब दिल्ली प्रदूषण से जूझ रही है, सड़कें टूटी पड़ी हैं, हर तरफ कूड़े के ढेर हैं और अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं, ऐसे समय में दिल्ली विधानसभा ने मुझे ‘फांसी घर’ पर सवाल पूछने के लिए बुलाया है। मैं 6 मार्च को उपस्थित रहूंगा, लेकिन मेरी विनती है कि कार्यवाही लाइव दिखाई जाए।”

विशेषाधिकार समिति का सख्त रुख

विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि जांच में देरी से बचने के लिए यह अंतिम अवसर दिया गया है। इससे पहले, इन नेताओं ने कई बार समन के बावजूद उपस्थित न होकर सदन की अवमानना की थी। केजरीवाल ने पहले 2 से 6 मार्च के बीच किसी भी दिन पेश होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद समिति ने 6 मार्च 2026 की समय-सीमा तय कर दी।

क्या है ‘फांसी घर’ विवाद?

यह पूरा विवाद 2021-22 में शुरू हुआ था, अगस्त 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने विधानसभा परिसर में ब्रिटिश काल के एक कमरे को ‘फांसी घर’ के रूप में उद्घाटित किया था। इसे स्वतंत्रता सेनानियों की याद में एक स्मारक की तरह सजाया गया था।

वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 1912 के नक्शों का हवाला देते हुए दावा किया कि यह कमरा वास्तव में एक ‘टिफिन रूम’ था, जहां रस्सियों से खाना नीचे भेजा जाता था। भाजपा का आरोप है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया है।

अब 6 मार्च को होने वाली यह पेशी तय करेगी कि इस ऐतिहासिक विवाद की हकीकत क्या है और क्या समिति केजरीवाल की ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ की मांग को स्वीकार करती है।

With AI Inputs

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