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Balen Shah Nepal New PM: शपथ लेते ही बालेन सरकार में बगावत! JNU वाले अमरेश सिंह ने ठुकराया मंत्री पद


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oi-Sumit Jha

Balen Shah Nepal New PM: बालेन शाह की नई सरकार के शपथ लेते ही नेपाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सबसे चौंकाने वाली खबर सर्लाही-4 से सांसद डॉ. अमरेश कुमार सिंह को लेकर आई है। जेएनयू (JNU) से पढ़े और अनुभवी राजनेता अमरेश सिंह ने बालेन सरकार में मंत्री पद का ऑफर ठुकरा दिया है।

राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने उन्हें उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। चर्चा है कि पीएम बालेन शाह द्वारा रक्षा जैसे अहम मंत्रालय अपने पास रखने के रणनीतिक फैसले के बाद अमरेश सिंह ने केवल सांसद के रूप में सेवा देने का फैसला किया है।

Balen Shah Nepal New PM

Balen Shah Cabinet Controversy: शपथ ग्रहण के साथ ही ‘बगावत’ की सुगबुगाहट

काठमांडू के राजनीतिक गलियारों में यह खबर आग की तरह फैली है कि नई सरकार के गठन के तुरंत बाद ही अंतर्विरोध शुरू हो गए हैं। अमरेश सिंह जैसे कद्दावर नेता का मंत्री बनने से इनकार करना बालेन सरकार के लिए एक शुरुआती झटका माना जा रहा है। हालांकि, सिंह ने आधिकारिक तौर पर इसे ‘बगावत’ नहीं बल्कि ‘जनता की सेवा’ का नाम दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि मंत्रालयों के बंटवारे और शक्ति के केंद्रीकरण को लेकर वे खुश नहीं हैं।

केही बेर अगाडि देखि मिडियाहरुमा आएको समाचार भ्रामक हुन यसमा कुनै सत्यता छैन । म सांसद कै रुपमा देश र जनता प्रती ईमानदारीपुर्ण रुपमा सेवा गर्नेछु। पार्टी र सरकार सङ को सहकार्यमा सम्पुर्ण नेपाली जनताको पक्षमा काम गर्नेछु।

— Dr. Amresh Kumar Singh (@Amreshjnu) March 27, 2026 “>

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Amresh singh rejects cabinet Post: जेएनयू वाले अमरेश सिंह का बड़ा कद

अमरेश कुमार सिंह कोई साधारण नेता नहीं हैं; वे बौद्धिक और जमीनी पकड़ रखने वाले राजनीतिज्ञ माने जाते हैं। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पढ़ाई करने वाले अमरेश कुमार सिंह ने संसदीय चुनावों में नेपाली कांग्रेस के दिग्गज नेता गगन थापा को हराकर अपनी ताकत साबित की थी। वे लगातार तीन बार सर्लाही से चुनाव जीत चुके हैं। इतने लंबे अनुभव वाले नेता का कैबिनेट से बाहर रहना सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।

बालेन शाह की ‘पावर गेम’ रणनीति

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस बार सत्ता की चाबी अपने पास रखने का फैसला किया है। उन्होंने न केवल प्रधानमंत्री का पद संभाला, बल्कि ‘रक्षा’ जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय भी अपने सीधे नियंत्रण में रखे हैं। माना जा रहा है कि यही वह मोड़ था जिसने अमरेश सिंह की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जब विभाग ही प्रधानमंत्री के पास रह गए, तो सिंह को लगा कि बिना पावर वाले मंत्रालय में रहने से बेहतर स्वतंत्र रहकर काम करना है।

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Amresh singh rejects ministerial post: गगन थापा को हराने वाले ‘जादुई’ नेता

अमरेश सिंह की पहचान एक ‘जायंट किलर’ के रूप में रही है। उन्होंने नेपाली कांग्रेस के कद्दावर नेता गगन थापा को पटखनी देकर सबको हैरान कर दिया था। इससे पहले वे मधेशी जनाधिकार फोरम और नेपाली कांग्रेस जैसे बड़े दलों में अहम भूमिका निभा चुके हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा राज्य व्यवस्था और सुशासन समितियों से होकर गुजरी है, जिससे उन्हें प्रशासन की बारीकियों का अच्छा अंदाजा है। यही अनुभव शायद उन्हें एक कमजोर मंत्री पद स्वीकार करने से रोकता है।

क्या होगा बालेन सरकार पर असर?

भले ही अमरेश सिंह ने कहा है कि वे केवल सांसद बनकर देश की सेवा करेंगे, लेकिन उनके इस कदम ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया है। नई सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह अपने सहयोगियों और प्रभावशाली निर्दलीय सांसदों को कैसे संतुष्ट रखे। काठमांडू की चर्चाओं के अनुसार, यह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर बालेन शाह ने सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं किया, तो आने वाले समय में अन्य सहयोगियों की नाराजगी भी सामने आ सकती है।





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