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Banking: बैंकों ने 60,518 करोड़ रुपये की लावारिस राशि आरबीआई फंड में भेजी, जानें क्या बोले वित्त राज्य मंत्री


सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से 60,518 करोड़ रुपये की लावारिस राशि भारतीय रिजर्व बैंक के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता फंड में स्थानांतरित की गई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 24 मार्च 2026 को राज्यसभा को यह जानकारी दी। यह राशि जनवरी 2026 के अंत तक की है।

उन्होंने बताया कि बीमा कंपनियों के पास फरवरी के अंत तक 8,973.89 करोड़ रुपये की लावारिस बीमा राशि बकाया थी। इसके अतिरिक्त, सेबी नियमों के तहत म्यूचुअल फंड में 3,749.34 करोड़ रुपये की लावारिस राशि थी। वित्तीय क्षेत्र के नियामकों ने इन लावारिस वित्तीय संपत्तियों की पहचान के लिए कई उपाय किए हैं। इसका उद्देश्य सही दावेदारों की समय पर पहचान सुनिश्चित करना है। साथ ही, मौजूदा लावारिस स्टॉक को कम करना और नई वृद्धि को रोकना भी है। नागरिकों के लिए दावा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना भी इन उपायों का लक्ष्य है। मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि सरकार ने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड में निवेशकों की रुचि की समीक्षा की है।

लावारिस राशि का विवरण

सार्वजनिक बैंकों द्वारा आरबीआई फंड में भेजी गई राशि 60,518 करोड़ रुपये है। यह जनवरी 2026 के अंत तक की स्थिति है। बीमा कंपनियों के पास फरवरी के अंत तक 8,973.89 करोड़ रुपये की लावारिस राशि थी। म्यूचुअल फंड में भी 3,749.34 करोड़ रुपये की लावारिस राशि दर्ज की गई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह सभी आंकड़े राज्यसभा में प्रस्तुत किए।

दावा प्रक्रिया में सुधार

वित्तीय क्षेत्र के नियामकों ने लावारिस वित्तीय संपत्तियों के लिए कई कदम उठाए हैं। इन उपायों का मुख्य लक्ष्य सही दावेदारों की पहचान को समय पर सुनिश्चित करना है। इसका उद्देश्य लावारिस संपत्तियों के मौजूदा स्टॉक को कम करना भी है। साथ ही, इसमें नई लावारिस राशियों के जमा होने को भी रोकना शामिल है। नागरिकों के लिए दावा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर भी जोर दिया गया है।

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड में निवेशकों की रुचि

सरकार ने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड में निवेशकों की रुचि की समीक्षा की है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में शुरू होने के बाद से औसत बिड-कवर अनुपात दो से ऊपर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह अनुपात 2.32 पर पहुंच गया है। 28 नवंबर, 2025 को हुई नवीनतम नीलामी में निवेशकों ने सात आधार अंक का ग्रीनियम दिया। यह दर्शाता है कि ये बॉन्ड निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। हालांकि, सरकार का सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड निवेशकों के लिए कर प्रोत्साहन शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।





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