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Bengaluru Chennai Expressway: 7 घंटे का सफर अब 3 घंटे में, एक्सप्रेसवे से बदलेगी दो शहरों की रोड कनेक्टिविटी


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oi-Smita Mugdha

Bengaluru Chennai Expressway: बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे (NE-7) दक्षिण भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव लाने जा रहा है। यह देश का पहला ‘हॉर्सशू’ (Horseshoe) आकार का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जिसका निर्माण तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 24 मार्च 2026 की ताजा स्थिति के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का लगभग 95% काम पूरा हो चुका है और इसका उद्घाटन मई या जून 2026 तक होने की संभावना है।

इस एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को ट्रायल के तौर पर पहले ही खोल दिया गया है, खासकर होसकोटे से आंध्र प्रदेश सीमा तक। इससे प्रोजेक्ट की उपयोगिता और सुरक्षा का परीक्षण किया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे दो मेट्रो सिटी के बीच रोड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी।

Bengaluru Chennai Expressway

Bengaluru Chennai Expressway: 7 घंटे का सफर 3 घंटे में

– इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यात्रा समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अभी बेंगलुरु से चेन्नई तक सफर करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं।

– नए एक्सप्रेसवे के जरिए यह समय घटकर सिर्फ 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा। साथ ही, यह नया मार्ग पुराने NH-48 के मुकाबले लगभग 80 किलोमीटर छोटा होगा।

– यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर गुजरता है। इसके प्रमुख शहरों में होसकोटे, मालुर, बंगारपेट, वी. कोटा, पालमनेर, गुडियाथम, अरक्कोनम और श्रीपेरंबुदूर शामिल हैं।

Bengaluru Chennai Expressway: 120 किमी की रफ्तार से दौड़ेंगी गाड़ियां

तकनीकी रूप से यह एक्सप्रेसवे बेहद आधुनिक है। इसे 120 किमी प्रति घंटे की डिज़ाइन स्पीड के साथ तैयार किया गया है। पूरे मार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम (ITS) लगाए गए हैं, जिनमें हाई-टेक कैमरे और सेंसर शामिल हैं, जो किसी भी दुर्घटना या जाम की स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना देंगे। चूंकि यह एक्सेस-कंट्रोल्ड है, इसलिए इसमें कहीं भी ट्रैफिक सिग्नल या क्रॉसिंग नहीं होगी।

बेंगलुरु से चेन्नई तक बनेंगे रोजगार के अवसर

आर्थिक दृष्टि से भी यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है। एक्सप्रेसवे के किनारे श्रीपेरंबुदूर और होसकोटे जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक हब विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, मुदालिंगनहल्ली में एक बड़ा मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक पार्क बनाया जा रहा है, जो इस कॉरिडोर से सीधे जुड़ा होगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों और ऑटो-रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देगा।



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