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Bengaluru STRR Project: शहर के बाहर बनेगा हाई-स्पीड रिंग रोड नेटवर्क, घंटों लंबे ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


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oi-Smita Mugdha

Bengaluru STRR Project: बेंगलुरु का ट्रैफिक लंबे समय से शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रहा है। अब सैटेलाइट टाउन रिंग रोड (STRR) इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रहा है। नेशनल हाईवे 948A के रूप में विकसित हो रही यह रिंग रोड बेंगलुरु के चारों ओर एक विशाल नेटवर्क तैयार कर रही है। इससे शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।

यह परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के कुल 12 प्रमुख कस्बों और शहरों को जोड़ती है। कर्नाटक में डोड्डाबल्लापुर, देवनहल्ली, होसकोट, सर्जापुर, अट्टीबेले, कनकपुरा, रामनगर, मागड़ी और डोबसपेट जैसे इलाके इससे जुड़ेंगे। तमिलनाडु के होसुर का एक हिस्सा भी इस नेटवर्क में शामिल है। इससे इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी।

Bengaluru STRR Project

Bengaluru STRR Project: 80 किमी लंबा हिस्सा हो गया शुरू

– मार्च 2026 तक की ताजा स्थिति के अनुसार, डोबसपेट से होसकोट तक लगभग 80 किलोमीटर लंबा हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है।

– इस सेक्शन के खुलने से तुमकुरु रोड और ओल्ड मद्रास रोड के बीच सफर काफी आसान और तेज हो गया है। वहीं, होसकोट से तमिलनाडु सीमा तक 21 किलोमीटर का हिस्सा निर्माण के अंतिम चरण में है।

– इस प्रोजेक्ट की एक खास बात यह है कि इसका एक हिस्सा बनेरघट्टा नेशनल पार्क के पास से गुजरता है। इस इलाके में कंस्ट्रक्शन का काम बहुत एहतियात से हो रहा है।

STRR Project: एलिवेटेड कॉरिडोर का भी निर्माण

यहां पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए वन्यजीवों के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर (ऊंचे रास्ते) बनाए जा रहे हैं, ताकि जानवरों की आवाजाही प्रभावित न हो। STRR का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी ट्रक और कमर्शियल वाहन अब शहर के भीतर प्रवेश किए बिना सीधे रिंग रोड के जरिए गुजर सकेंगे। इससे सिल्क बोर्ड और आउटर रिंग रोड जैसे व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

Bengaluru STRR: कुछ हिस्सों में टोल प्लाजा शुरू

साथ ही, इस रूट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और इंडस्ट्रियल पार्क तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे देवनहल्ली और डोड्डाबल्लापुर जैसे क्षेत्रों में रियल एस्टेट को भी बढ़ावा मिल रहा है। करीब ₹17,000 करोड़ की लागत से बन रही यह 4 से 6 लेन की एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे परियोजना वाहनों को 100 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चलने की सुविधा देगी। इसके कुछ हिस्सों पर टोल प्लाजा भी शुरू हो चुके हैं।



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