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Bihar News: 1 अप्रैल से शुरू होगी गेहूं खरीद, किसानों को मिलेगा ₹2585 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य


बिहार 1 अप्रैल से 15 जून 2026 तक 2026-27 रबी सीज़न के लिए गेहूँ की खरीद शुरू करेगा। विकेन्द्रीकृत संचयी खरीद (डीसीपी) प्रणाली के तहत, एमएसपी ₹2585 प्रति क्विंटल है। बिहार राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम नेतृत्व करता है, जिसमें पीएसी और ब्लॉक-स्तरीय व्यापारी खरीद के लिए अधिकृत हैं, जबकि एफसीआई भी सुचारू पीडीएस वितरण सुनिश्चित करने के लिए भाग लेता है।

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-Oneindia Staff

रबी विपणन मौसम 2026-27 के तहत बिहार में 1 अप्रैल 2026 से राज्यव्यापी गेहूं अधिप्राप्ति अभियान शुरू होने जा रहा है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस संबंध में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। जारी अधिसूचना के अनुसार गेहूं खरीद का कार्य 1 अप्रैल से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इस अवधि में राज्य के किसानों से निर्धारित समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाएगी।

Bihar Wheat Procurement 2026-27 MSP

विकेंद्रीकृत अधिप्राप्ति (DCP) प्रणाली के तहत बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। वहीं सहकारिता विभाग के अंतर्गत पंचायत स्तर पर पैक्स और प्रखंड स्तर पर व्यापार मंडलों को खरीद एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। ये एजेंसियां किसानों से सीधे गेहूं खरीदेंगी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत संग्रहण केंद्रों पर जमा करेंगी, जहां गुणवत्ता जांच के बाद भंडारण किया जाएगा।

FCI भी करेगा खरीद

भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भी राज्य के चिन्हित प्रखंडों में गेहूं खरीद के लिए अधिकृत किया गया है। निगम द्वारा स्थापित क्रय केंद्रों पर गेहूं की गुणवत्ता जांच कर उसे निर्धारित गोदामों में संग्रहित किया जाएगा।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में होगा उपयोग

राज्य सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूं का उपयोग खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लक्षित जन वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से किया जाएगा, जिससे जरूरतमंद लोगों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।

पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और अधिप्राप्ति एजेंसियों को निर्देश दिया है कि खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारू और समयबद्ध तरीके से संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके।

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