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BJP Foundation Day: भाजपा के पास अथाह संपत्ति,18 करोड़ सदस्य—फिर भी क्यों अधूरे हैं ये बड़े टारगेट? 10 फैक्ट्स


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oi-Pallavi Kumari

BJP Foundation Day 2026: भारतीय राजनीति की सबसे ताकतवर और सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को अस्तित्व में आई इस पार्टी ने दो सीटों से शुरू होकर देश की सत्ता तक का सफर तय किया, लेकिन आज भी कुछ ऐसे राज्य और लक्ष्य हैं, जहां BJP की पकड़ पूरी तरह नहीं बन पाई है। यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है-सत्ता, संसाधन और संगठन के बावजूद कुछ ‘मिशन’ अब भी अधूरे हैं। आइए जानें 10 बड़े फैक्ट्स।

BJP Foundation Day 2026

1. दो सीटों से सत्ता के शिखर तक का सफर

आज भले ही BJP दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती हो, लेकिन 1984 के लोकसभा चुनाव में इसे सिर्फ 2 सीटें मिली थीं। उस समय गुजरात से ए.के. पटेल और आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा से जंगा रेड्डी पार्टी के सांसद बने थे। इसके बाद पार्टी ने धीरे-धीरे अपने संगठन को मजबूत किया और 2014 में पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया।

इस सफर में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान अहम रहा, जिन्होंने 1999 से 2004 तक गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री के तौर पर पूरा कार्यकाल पूरा किया। वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP ने लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता संभाली है।

2. दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर पार्टी

सदस्यता के मामले में BJP ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया है। पार्टी के 18 करोड़ से अधिक सदस्य बताए जाते हैं। आर्थिक रूप से भी BJP सबसे आगे है। चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक पार्टी के पास ₹7,113.80 करोड़ का फंड बैलेंस था, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पास ₹857.15 करोड़ ही थे। वित्त वर्ष 2024-25 में BJP की आय ₹6769 करोड़ तक पहुंच गई।

3. खर्च और फंडिंग का बड़ा खेल

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले BJP ने अपने खर्च में बड़ा इजाफा किया। 2023-24 में पार्टी ने ₹1,754.06 करोड़ खर्च किए, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 60% ज्यादा है। इलेक्टोरल बॉन्ड्स (अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंद) के जरिए पार्टी को ₹1,685.69 करोड़ मिले। इसके अलावा अन्य स्रोतों से ₹2,042.75 करोड़ का योगदान भी मिला।

विज्ञापन पर ₹591 करोड़ खर्च किए गए, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ₹434.84 करोड़ और प्रिंट पर ₹115.62 करोड़ शामिल हैं। वहीं हेलीकॉप्टर और विमान पर ₹174 करोड़ और उम्मीदवारों को वित्तीय मदद के तौर पर ₹191 करोड़ दिए गए।

4. BJP चुनाव चिन्ह का इतिहास

BJP को आज हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति के लिए जाना जाता है, लेकिन 1980 में पार्टी ने ‘गांधीवादी समाजवाद’ को अपनी विचारधारा के रूप में अपनाया था। बाद में 1985 में ‘एकात्म मानववाद’ को इसका मूल दर्शन माना गया।

पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘कमल’ है, जो भारत का राष्ट्रीय फूल भी है। इसका ऐतिहासिक महत्व 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है, जहां ‘रोटी और कमल’ प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल हुए थे।

5. BJP की जड़ें 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ में मिलती हैं। 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते 1980 में BJP का गठन हुआ।

BJP Foundation Day 2026

6. किन राज्यों में अब भी अधूरा मिशन? (Where BJP Still Struggles)

भले ही आज देश के 21 राज्यों में BJP या NDA की सरकार हो, लेकिन कुछ बड़े राज्य अब भी पार्टी के लिए चुनौती बने हुए हैं। पश्चिम बंगाल, केरल और तेलंगाना जैसे राज्यों में BJP अब तक सरकार नहीं बना सकी है। वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में पार्टी को गठबंधन के सहारे ही सत्ता का हिस्सा बनना पड़ा है। यही वे टारगेट हैं, जिन्हें हासिल करना BJP के लिए अगली बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

7. इन राज्यों में BJP का लंबा शासन

गुजरात में BJP पिछले 30 साल से सत्ता में है। 2022 के चुनाव में पार्टी ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। मध्य प्रदेश में भी 20 साल से ज्यादा समय से पार्टी का दबदबा बना हुआ है (बीच में 15 महीने कांग्रेस सरकार को छोड़कर)। हरियाणा में BJP ने सत्ता विरोधी लहर के ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार तीसरी बार सरकार बनाई।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2017 से सरकार चल रही है।

8. आगे की चुनावी चुनौतियां (Upcoming Electoral Battles)

आने वाले समय में BJP के सामने कई बड़ी चुनावी चुनौतियां हैं। असम में हैट्रिक का लक्ष्य है, जबकि तमिलनाडु में AIADMK के साथ सत्ता में वापसी की कोशिश जारी है। पश्चिम बंगाल और केरल में पार्टी पहली बार सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वे राज्य हैं, जो BJP के ‘अधूरे टारगेट’ की सूची में सबसे ऊपर हैं।

9. मोदी का रिकॉर्ड और नेतृत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के 8930 दिनों के रिकॉर्ड से भी आगे निकल गया है। यह उन्हें देश के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल करता है।

10. ताकत के बावजूद अधूरी कहानी

47 साल में BJP ने जो मुकाम हासिल किया है, वह भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व है। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर पार्टी होने के बावजूद कुछ राज्य और राजनीतिक लक्ष्य अब भी इसके लिए चुनौती बने हुए हैं। यही वजह है कि BJP की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उन अधूरे लक्ष्यों की भी है, जिन्हें हासिल करना अब पार्टी की अगली बड़ी परीक्षा होगी।

BHARATIYA JANATA PARTY HISTORY: भारतीय जनता पार्टी का इतिहास?

🔹 आज की भारतीय जनता पार्टी की जड़ें 1951 में बनी भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विभाजन, पाकिस्तान नीति और हिंदुओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नेहरू सरकार का विरोध किया। इन्हीं मतभेदों के चलते उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दिया और जनसंघ के गठन की दिशा में कदम बढ़ाया। 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में जनसंघ का आधिकारिक गठन हुआ।

🔹 पहले आम चुनाव में जनसंघ को 3.06% वोट और 3 सीटें मिलीं। संसद में ‘नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट’ बनाया गया, जिसमें 38 सांसद शामिल थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश का पहला अनौपचारिक विपक्ष नेता माना गया।

जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान, अलग झंडा और अलग पीएम के खिलाफ जनसंघ ने आंदोलन किया। 1953 में बिना परमिट कश्मीर जाने पर डॉ. मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया। 23 जून 1953 को हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई, जिसे समर्थक ‘बलिदान’ मानते हैं।

🔹 दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म मानववाद’ की विचारधारा दी। जनसंघ ने स्वदेशी, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकेंद्रीकरण की बात उठाई। 1950-60 के दशक में पार्टी लगातार अपने संगठन को मजबूत करती रही।

🔹 1959 में चीन के खिलाफ आवाज उठाई और तिब्बत की आजादी की मांग की। 1965 के भारत-पाक युद्ध में जनसंघ ने सरकार का समर्थन किया। ताशकंद समझौते का विरोध किया गया।

🔹 1967 में जनसंघ देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। लोकसभा में 35 सीटें और राज्यों में 268 विधायक जीते। कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारों में भागीदारी रही।

🔹 1968 में रहस्यमयी परिस्थितियों में दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु हो गई। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी अध्यक्ष बने। 1975 में आपातकाल लागू हुआ, RSS और विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया। जनसंघ और RSS कार्यकर्ताओं ने आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई।

🔹 1977 में जनसंघ, समाजवादी और अन्य दल मिलकर जनता पार्टी बने।चुनाव जीतकर सरकार बनी, लेकिन ‘डुअल मेंबरशिप’ विवाद के कारण पार्टी टूट गई। 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ। ‘पंच निष्ठा’ के आधार पर नई पार्टी की शुरुआत हुई।

🔹 इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में BJP को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। यह पार्टी के लिए सबसे कठिन दौर था। बोफोर्स घोटाले और राम मंदिर आंदोलन के बाद BJP मजबूत हुई। 1989 में सीटें बढ़कर 86 हो गईं। लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को भारी समर्थन मिला।

🔹 अयोध्या आंदोलन BJP की राजनीति का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। 1991 में उत्तर प्रदेश में BJP सरकार बनी। 1996, 1998 और 1999 में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनी।
अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और NDA सरकार चलाई। 2004 में NDA चुनाव हार गया।

🔹 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के साथ नई राजनीतिक दिशा मिली। पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई।



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