वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापारिक नीतियों बीच एक जरूरी खबर सामने आई है। कैमरून में विश्व व्यापार संगठन की बैठक के दौरान भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा हुई। इस अहम वार्ता ने इस दिशा में रुकी हुई प्रक्रिया को फिर से गति देने का काम किया है।
डब्ल्यूटीओ सम्मेलन में हुई अहम चर्चा
कैमरून के याउंडे में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के मौके पर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को USTR जैमिसन ग्रीर के साथ बैठक की। इस मुलाकात में दोनों पक्षों ने प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के अगले चरणों की समीक्षा की और आर्थिक व द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और गहरा करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
ट्रंप का नया टैरिफ और समझौते में देरी का कारण
दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच पिछले महीने ही पहले चरण के व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया गया था, जिस पर इसी महीने हस्ताक्षर होने थे।
- 2 और 7 फरवरी को हुए एलानों के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया था।
- लेकिन, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ उपायों को खारिज किए जाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।
- इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% का नया वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया।
अब आगे क्या उम्मीद?
ट्रंप प्रशासन के इस नए टैरिफ नियम के कारण, समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए भारत और अमेरिका के मुख्य वार्ताकारों की योजनाबद्ध बैठक को टाल दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अब अमेरिका का नया वैश्विक टैरिफ ढांचा पूरी तरह लागू होने के बाद ही इस अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच ऊर्जा कूटनीति भी एक अहम मोड़ पर है। भारत रूस से एलएनजी की खरीद फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है।



