Homeव्यवसायCabinet: जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी, चीन समेत...

Cabinet: जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी, चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में ढील की खबर


केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को सरल बना दिया। अब इन देशों की 10 फीसदी तक की हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां अनिवार्य मंजूरी के बिना देश में निवेश कर सकेंगी। अभी इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती थी। हालांकि, एफडीआई मानदंडों की अन्य शर्तें, जिनमें क्षेत्रीय सीमाएं और प्रवेश मार्ग शामिल हैं, इन निवेशों पर लागू होंगी।

साथ ही देश में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी इन्वेस्टमेंट एजेंडा 2024’ के तहत कैबिनेट ने कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इन फैसलों में रेलवे, हाईवे, एविएशन और ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे प्रमुख सेक्टर्स शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे। 

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये के फंड में से सबसे बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है। सरकार ने ‘जल जीवन मिशन’ के विस्तार के लिए 8.7 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।

कनेक्टिविटी और यातायात सुविधाओं का विस्तार

बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और परिवहन को सुगम बनाने के लिए सरकार ने कई प्रमुख रेलवे और सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ विमानन क्षेत्र के लिए अहम फैसले लिए हैं:


  • एविएशन सेक्टर: एक प्रमुख नीतिगत फैसले के तहत मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) घोषित किया गया है। 

  • रोड नेटवर्क: जेवर एयरपोर्ट और फरीदाबाद सेक्शन को जोड़ने वाले एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए 3,631 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा, बदनावर-थांदला-टिमरवानी (NH 752 D) राजमार्ग को 4-लेन बनाने के लिए 3,839 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

  • रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर: रेल यातायात की भीड़ कम करने और माल ढुलाई को तेज करने के लिए संतरागाछी-खड़गपुर के बीच चौथी लाइन बिछाने के लिए 2,905 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसी तरह सैंथिया-पाकुड़ के बीच चौथी रेलवे लाइन के लिए 1,569 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 

व्यापार और निवेश के प्रमुख आंकड़े


  • भले ही सरकार ने अब नियमों में ढील दी है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से भारत में चीनी निवेश का हिस्सा बहुत कम रहा है। 

  • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2021 के बीच भारत में हुए कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी मात्र 0.43% (2.45 बिलियन डॉलर) रही है। 

  • नए नियमों के तहत, इन निवेशों से जुड़े विवरण उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को पूर्व में देने होंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एफडीआई नियमों से जुड़े 2020 के प्रेस नोट-3 (पीएन3) में बदलाव किया है।

  • केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, संशोधन में लाभकारी स्वामित्व के निर्धारण के लिए परिभाषा व मानदंड का प्रावधान है, जिसका उपयोग निवेश समुदाय की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम नियम, 2003 के तहत किया जाता है। लाभकारी स्वामित्व परीक्षण निवेशक इकाई के स्तर पर लागू होगा।

  • गैर-नियंत्रणकारी भूमि सीमावर्ती देशों (एलबीसी) के निवेशकों को क्षेत्रीय सीमाओं, प्रवेश मार्गों व शर्तों के अनुसार स्वचालित मार्ग के तहत 10 फीसदी तक लाभकारी स्वामित्व की अनुमति मिलेगी। सरकार ने विशिष्ट क्षेत्रों में एलबीसी से निवेश प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी का भी निर्णय किया है। इसके तहत, पूंजीगत व इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं-घटक, पॉलीसिलिकॉन एवं इनगॉट-वेफर या कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के सुझाव पर निवेश प्रस्तावों पर 60 दिन में निर्णय होगा।

  • इन मामलों में, निवेशित इकाई की अधिकांश शेयरधारिता व नियंत्रण भारतीय नागरिकों के स्वामित्व व नियंत्रण वाली भारतीय कंपनी का होगा। कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहणों को रोकने के लिए, सरकार ने अप्रैल, 2020 में एफडीआई नीति में संशोधन किया था।

चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है…


  • 2024-25 में भारत का चीन को निर्यात 14.5% घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया। 2023-24 में यह 16.66 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा 2023-24 के 85 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर हो गया।

  • अप्रैल-जनवरी 2025-26 में, भारत का चीन को निर्यात 38.37 फीसदी बढ़कर 15.88 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 13.82 फीसदी बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। व्यापार घाटा 92.3 अरब डॉलर रहा।

  • किसी चीनी फर्म के निवेश के लिए अब भी सरकार की मंजूरी जरूरी होगी, लेकिन अब इसमें एक क्लॉज है जिसके अनुसार देश के लिए महत्वपूर्ण कुछ चुनिंदा सेक्टरों में सरकार को 60 दिन के अंदर निवेश प्रस्ताव के बारे में फैसला लेना होगा।

  • जिन निवेशक फर्म में चीनी स्वामित्व 10 फीसदी से कम है, वे अब निवेश का सामान्य रास्ता चुन सकते हैं। यह सभी क्षेत्रों पर लागू होगा। यानी सिंगापुर की पीई फर्म, जिसमें चीनी निवेश 10 फीसदी से कम है, उनके साथ सामान्य अमेरिकी पीई फर्म की तरह व्यवहार किया जाएगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में तय लक्ष्य हासिल करने के लिए चीन व भारत के बीच तीन आयामी गठजोड़ जरूरी है। ये हैं-चिप्स, निवेश और प्रतिभा।

  • एफडीआई नीति में संशोधन का मकसद स्टार्टअप और डीप टेक के लिए वैश्विक फंडों से अधिक एफडीआई आकर्षित करना और कारोबार में सुगमता की कार्य योजना को आगे बढ़ाना है।

  • भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार व अफगानिस्तान हैं। हालांकि पाकिस्तान के साथ अभी भारत के सभी कारोबार बंद हैं।

  • बढ़ता व्यापार: न्यूनतम निवेश के बावजूद, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार कई गुना बढ़ा है और बीजिंग भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है।

  • आयात-निर्यात: वर्ष 2024-25 में चीन से भारत का आयात 11.52% बढ़कर 113.45 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 14.5% घटकर 14.25 बिलियन डॉलर रहा। 

  • वर्तमान रुझान: चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी 2025-26) के दौरान चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में 38.37% का भारी उछाल आया है (15.88 बिलियन डॉलर), वहीं आयात भी 13.82% बढ़कर 108.18 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। इस अवधि में व्यापार घाटा 92.3 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया है। 

इन बड़े फैसलों की भी खबर


सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मंगलवार को चीन सहित उन सभी देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए नियमों में ढील दी है, जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रेस नोट 3 ऑफ 2020 में संशोधन किया गया है।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों पर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की।



उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने कहा कि “कैबिनेट द्वारा आज ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है”। डीपीआईआईटी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का एक अंग है जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित मुद्दों से निपटता है।



प्रेस नोट 3 के तहत, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को किसी भी क्षेत्र में निवेश के लिए अनिवार्य सरकारी अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।


भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं।


 

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, एफडीआई नियमों में ढील देने के साथ-साथ, कैबिनेट ने कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने वाले दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी है। दिवाला प्रक्रिया को और अधिक सुचारू बनाने के लिए ‘इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) बिल 2025’ में संशोधनों को मंजूरी दी गई है। यह बदलाव सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। इसके अलावा, कंपनियों के कामकाज को बेहतर बनाने के उद्देश्य से ‘कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक’ को भी हरी झंडी दी गई है।

अब आगे क्या?

चीन और अन्य पड़ोसी देशों के लिए एफडीआई नियमों में यह ढील विदेशी पूंजी प्रवाह को फिर से गति देने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच घरेलू औद्योगिक विकास और सप्लाई चेन की जरूरतों को संतुलित करने का प्रयास कर रही है। इससे उन क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें तकनीकी और पूंजीगत विस्तार के लिए विदेशी निवेश की सख्त दरकार है।





Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments