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Crude Oil: होर्मुज पर संकट से कच्चा तेल की कीतमों में 2.2 प्रतिशत का उछाल, जानें वैश्विक बाजारों का हाल


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2.2% की तेजी दर्ज की गई। हालांकि सोमवार को आई तेज उछाल के बाद बाजार में कुछ ठंडक देखने को मिली, जब अमेरिका ने घरेलू ऊर्जा कीमतों को काबू में रखने के लिए कदम उठाने के संकेत दिए।

मंगलवार को 04:00 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा कीमत 1.70 डॉलर यानी 2.2 प्रतिशत बढ़कर 79.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। सोमवार को यह अनुबंध 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया था, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। हालांकि बाद में कुछ बढ़त घटने के बावजूद यह 6.7 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.17 डॉलर यानी 1.6 प्रतिशत उछलकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले सत्र में यह जून 2025 के बाद के उच्चतम स्तर तक पहुंचा था, हालांकि बाद में कुछ गिरावट आई, फिर भी यह 6.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

आईजी मार्केट के विश्लेषक टोनी साइकामोर ने रॉयटर्स से कहा कि स्थिति में जल्द कोई नरमी नजर नहीं आ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है और ईरान क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने की मंशा दिखा रहा है। ऐसे में कीमतों में और तेजी का जोखिम बना हुआ है और संघर्ष जितना लंबा खिंचेगा, जोखिम उतना बढ़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। दुनिया की लगभग 20% पेट्रोलियम तरल आपूर्ति और करीब 20% एलएनजी (LNG) शिपमेंट इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल ला सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंचता है और जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतों में तेज उछाल संभव है।

मॉर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम एशिया में पूर्ण पैमाने पर संघर्ष छिड़ता है और होर्मुज के रास्ते तेल प्रवाह बाधित रहता है, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ती चिंता?

कच्चे तेल की ताजा तेजी ने तीन अंकों वाली कीमतों की आशंका फिर जगा दी है। तेल आयात पर निर्भर भारत के लिए यदि कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिकती हैं, तो आयात बिल बढ़ सकता है, महंगाई पर दबाव बन सकता है और राजकोषीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।



हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए योजनाओं की घोषणा करेंगे। इस बयान से सोमवार की घबराहट कुछ हद तक थमती दिखी, लेकिन बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की गतिविधियों पर टिकी हुई है।

क्या रहा एशियाई बाजरों का हाल?

मंगलवार को अन्य एशियाई बाजारों में प्रमुख सूचकांकों पर बिकवाली का दबाव बढ़ रहा था। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.71 प्रतिशत गिरकर 57065 के स्तर पर आ गया, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.24 प्रतिशत गिरकर 25985 पर पहुंच गया। हालांकि, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 0.94 प्रतिशत बढ़ा। ताइवान का भारित सूचकांक 0.36 प्रतिशत गिरकर 34967 के स्तर पर आ गया और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 2.42 प्रतिशत गिर गया।



सोमवार को अमेरिकी बाजारों में, डाउ जोन्स इंडेक्स में मामूली 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 48904.78 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 6881 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में 0.41 प्रतिशत की तेजी आई और यह 22761 पर बंद हुआ।





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