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CV Ananda Bose Resign: विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने दिया इस्तीफा


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oi-Bhavna Pandey

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। साढ़े तीन साल की सेवा के बाद उनका यह कदम राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों से कुछ ही हफ्ते पहले आया है। दिल्ली में मौजूद बोस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

इस्‍तीफा देने के बाद क्‍या बोले सी.वी. आनंद बोस?

राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद बोस ने पीटीआई को बताया, “मैंने गवर्नर के ऑफिस में काफी समय बिताया है।” उन्हें जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति बनने पर 23 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

CV Ananda Bose

सी.वी. आनंद बोस ने तीन साल और पांच महीने पश्चिम बंगाल का राज्‍यपाल पद संभाला। अपने कार्यकाल में बोस राज्य के कई मुद्दों पर मुखर थे और उन्होंने ममता बनर्जी सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना की, जिससे राज्य और राजभवन में कई बार टकराव बढ़ा।

तमिलनाडु राज्यपाल आर.एन. रवि को सौंपा गया अतिरिक्‍त कार्यभार

पीटीआई ने लोक भवन अधिकारियों के हवाले से इसकी पुष्टि की। उनके इस्तीफे के बाद, तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अस्थायी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीएम ममता बनर्जी ने राज्‍यपाल के इस्‍तीफे पर दी तीखी प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से मैं हैरान और बहुत परेशान हूं।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस्तीफे के पीछे के कारणों की जानकारी नहीं, पर मौजूदा हालात में उन्हें किसी राजनीतिक दबाव की आशंका थी।

मुख्यमंत्री बनर्जी ने अपनी पोस्ट में कहा, “मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला हो।” उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री पर आरोप लगाया कि आर.एन. रवि को राज्यपाल बनाए जाने पर उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। ममता बनर्जी ने इसे “भारत के संविधान की भावना को कमज़ोर करने वाला” और “हमारे फेडरल स्ट्रक्चर की बुनियाद पर ही हमला” बताया। उन्होंने केंद्र से कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का सम्मान करने की अपील की।



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