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Economy: ‘भारत का ऋण प्रबंधन शानदार’, वित्त मंत्री ने बताया- चुनौतियों के बीच क्या होगी विकसित भारत की राह?


वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी भारी उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक मजबूती और वित्तीय अनुशासन पर बड़ी टिप्पणी की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय लोक वित्त व नीति संस्थान (एनआईएफपी) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साफ किया है कि यह वर्ष कई बाहरी और आंतरिक चुनौतियों से भरा है, फिर भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत का कर्ज प्रबंधन सबसे बेहतर स्थिति में है। 

भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे आगे: वित्त मंत्री

दुनिया भर में सार्वजनिक ऋण में भारी उछाल देखा जा रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने अपने ऋण प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके एक मिसाल कायम की है। वित्त मंत्री ने बताया कि भारत का कुल ऋण-से-जीडीपी अनुपात 81 प्रतिशत के स्तर पर है। यह 81 प्रतिशत का आंकड़ा वर्तमान में सभी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। वित्त मंत्री के अनुसार, यह महत्वपूर्ण डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि भारत दुनिया भर में कर्ज के बढ़ते बोझ के बावजूद अपनी आर्थिक स्थिरता को नियंत्रित रखने में सफल रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चतता का दौर 

भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन की तुलना में वैश्विक परिदृश्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। वित्त मंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था इस समय भारी अस्थिरता (Volatility), अनिश्चितता (Uncertainty), जटिलता (Complexity) और अस्पष्टता (Ambiguity) के दौर से गुजर रही है। 

इस वैश्विक संकट में सबसे बड़ा जोखिम पश्चिम एशिया से आ रहा है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:


  • प्रणालीगत झटके: मध्य पूर्व का संघर्ष अब एक प्रणालीगत झटके या सिस्टमिक ट्रेमर में बदल गया है, जो सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा की महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। 

  • क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं: वित्त मंत्री ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में संघर्ष के लगातार बढ़ने और इसके कारण पैदा हुई क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं की वजह से यह चालू वर्ष अर्थव्यवस्था के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

विकसित भारत का लक्ष्य और दोहरी चुनौतियां

इन वैश्विक संकटों के बीच सरकार के सामने ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य साफ तौर पर रखा गया है। इस लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग केवल बाहरी भू-राजनीतिक संकटों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को घरेलू मोर्चे पर भी बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। 



वित्त मंत्री सीतारमण ने नीति निर्माताओं और बाजारों को स्पष्ट किया कि बाहरी संकटों के साथ-साथ भारत को मानसून  जैसी महत्वपूर्ण आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। मानसून का प्रदर्शन सीधे तौर पर भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, इसलिए इसे विकसित भारत के रोडमैप में एक अहम चुनौती माना गया है।





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