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oi-Siddharth Purohit
Explained: ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर अब अमेरिकी सियासत गर्म हो गई है। जिसकी आंच में ट्रंप हर वक्त तप रहे हैं। दरअसल अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट सांसदों के एक ग्रुप ने इस युद्ध पर Public Hearing (सार्वजनिक सुनवाई) की मांग की है। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह युद्ध क्यों शुरू हुआ, इसके लक्ष्य क्या हैं और यह कितने समय तक चल सकता है। ये सवाल अब ट्रंप के गले की फांस बन गए हैं। आइए समझते हैं क्या है पूरा मामला।
कहां से विपक्ष रडार पर आए ट्रंप?
दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए थे। इसके बाद से कई बार अमेरिकी अधिकारियों ने कांग्रेस सदस्यों को बंद कमरे में जानकारी दी है। इन बैठकों में विदेश मंत्री Marco Rubio और रक्षा मंत्री Pete Hegseth जैसे सीनियर ऑफीसर शामिल थे। इनका मकसद सांसदों को सैन्य अभियान की स्थिति और प्रगति के बारे में जानकारी देना था। लेकिन ये जानकारी सभी सांसदों को अलग-अलग दी गई। जिसका मकसद ये बताया जा रहा है कि अगर सांसदों को इस पर राय बनानी हो तो वे आपस में बात ही न कर सकें, और यहीं से बात बिगड़ गई। अब ज्यादातर सांसदों का कहना है कि इससे जनता के बीच भ्रम और सवाल दोनों बढ़ रहे हैं।

डेमोक्रेट सांसदों की नाराजगी
कई डेमोक्रेट सीनेटरों का कहना है कि ब्रीफिंग के बाद भी उन्हें युद्ध का मकसद क्या है, वजह क्या है, कब तक चलेगा और भविष्य की रणनीति क्या होगी, ऐसे सवालों के जवाब नहीं दिए गए। उनका कहना है कि सरकार को जनता और कांग्रेस दोनों को साफ तौर पर बताना चाहिए कि इस युद्ध का अंतिम लक्ष्य क्या है। कुछ सांसदों को इस बात का भी डर सता रहा है कि कहीं वियतनाम युद्ध की तरह ये युद्ध भी लंबा न खिंच जाए, जिसके बाद सालों तक सफाई देनी पड़े।
ईरान के स्कूल पर हमले की जांच की मांग
इसके अलावा, युद्ध की शुरुआत में छह डेमोक्रेट सीनेटरों ने दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले की जांच की मांग भी की। जिसमें कम से कम 170 लोग मारे जाने का दावा किया गया था, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस हमले में अमेरिकी सेनाएं शामिल हो सकती हैं।
ट्रंप की टीम में ही मतभेद
कनेक्टिकट के ही सीनेटर Richard Blumenthal ने कहा कि उन्हें इस युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आता। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति एक ही सांस में कहते हैं कि युद्ध लगभग खत्म हो गया है और साथ ही यह भी कहते हैं कि यह अभी शुरू हुआ है। यह काफी विरोधाभासी लगता है।” इसके अलावा उनकी टीम से भी अलग-अलग तरह के बयानों का आना अमेरिकी जनता को कन्फ्यूज कर रहा है। इसके अलावा ट्रंप भी कभी इजरायल के कहने पर तो कभी उनकी टीम के कहने पर युद्ध में दाखिल होने की दोहरी बात कहकर अविश्वास पैदा कर रहे हैं।
युद्ध के खर्च न भी बढ़ाई टेंशन
मैसाचुसेट्स से सीनेटर Elizabeth Warren ने युद्ध की लागत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, जब 1.5 करोड़ अमेरिकियों के पास स्वास्थ्य सेवा के लिए पैसा नहीं है, तब ईरान पर बमबारी करने के लिए हर दिन करीब एक अरब डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास बजट को कंट्रोल करने की शक्ति है और इसके जरिए ऐसे मिलिट्री ऑपरेशन्स को रोका जा सकता है।
ईरान की जमीन पर भेजे जाएंगे सैनिक?
कुछ सांसदों ने इस पर भी सवाल उठाए कि आने वाले वक्त में अमेरिका, ईरान में जमीन से सैनिक तैनात कर सकता है। इस पर डेमोक्रेटिक सीनेटर ब्लुमेंथल ने कहा कि हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर भेजा जा सकता है। साथ ही उन्होंने युद्ध में हो रहे खर्च, सैनिकों के लिए खतरे और इसके फैलने की संभावना के बारे में पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।
रिपबल्किन के पास कितना है बहुमत?
फिलहाल अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का मामूली बहुमत है। इसका मतलब है कि संसद में किसी भी कानून या बहस को कंट्रोल करने की ताकत उनके पास है। वहीं, हाल ही में हुई बंद कमरे की ब्रीफिंग के बाद कई डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप को काफी कोसा, क्योंकि उन्होंने यह भी साफ नहीं किया है कि क्या भविष्य में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को ईरान भेजा जाएगा या नहीं। इसके अलावा कनेक्टिकट से सीनेटर Chris Murphy ने कहा कि उन्हें यह मीटिंग असंगत लगी, और यदि ट्रंप इस युद्ध के लिए विपक्ष से पूछते तो कभी इजाजत भी नहीं मिलती।
ट्रंप के खेमे में भी टकराव
ट्रंप के राजनीतिक दल रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसद इस युद्ध के पक्ष में हैं लेकिन रिपब्लिकन सांसदों का एक बड़ा धड़ा इस युद्ध के खिलाफ भी है। दक्षिण कैरोलिना की प्रतिनिधि Nancy Mace ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह अपने राज्य के बेटों और बेटियों को ईरान के साथ युद्ध में नहीं भेजना चाहतीं। इसके अलावा, केंटकी के रिपब्लिकन सीनेटर Rand Paul ने कहा कि सरकार हर दिन युद्ध के लिए अलग-अलग कारण बता रही है और इनमें से कोई भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं लगता। उन्होंने सरकार को ही गैर-भरोसेमंद बता दिया। रैंड पॉल ने कहा कि दबे-कुचले लोगों को आजाद करना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन सवाल यह है कि यह कहां खत्म होगा। युद्ध हमेशा आखिरी विक्लप होना चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बहस
इस विवाद के बाद अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस पर फिर से सुर्खियों में आ गई है। अमेरिकी संविधान के मुताबिक जंग का ऐलान करने का अधिकार कांग्रेस के पास है। लेकिन अब राष्ट्रपति बिना औपचारिक इजाजत के ही जंग शुरू कर रहे हैं। अमेरिकी कानून के मुताबिक राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना 60 दिनों तक सेना तैनात कर सकते हैं। इसके बाद अगर कांग्रेस मंजूरी नहीं देती, तो सेना को वापस बुलाने के लिए 30 दिनों की अवधि दी जाती है।
क्या यह कार्रवाई असंवैधानिक है?
अमेरिकी कानून के विशेषज्ञ David Schultz के मुताबिक इस मामले में दो तरह के तर्क दिए जा सकते हैं। पहला यह कि यह कार्रवाई संविधान का उल्लंघन है क्योंकि इसे औपचारिक रूप से युद्ध घोषित नहीं किया गया। दूसरा यह कि राष्ट्रपति ने कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपने अधिकारों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया।
खुफिया एजेंसियों का अलग दावा
हालांकि इस दावे के उलट अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पहले ही कहा था कि उनके पास अमेरिका या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर किसी आसन्न ईरानी खतरे का कोई ठोस सबूत नहीं था।
यही वजह है कि ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिका के अंदर राजनीतिक बहस और भी तेज होती जा रही है।
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