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Export: भारतीय निर्यात क्षेत्र में मजबूत उछाल, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 6.15% की वृद्धि दर्ज


इस वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था का बाहरी क्षेत्र काफी मजबूत बना हुआ है। अप्रैल से जनवरी 2025-26 के बीच देश का कुल निर्यात 720.76 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि के 679.02 अरब डॉलर से 6.15% ज्यादा है। यह जानकारी व्यापार मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का कैसा है प्रदर्शन?

यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य आर्थिक नीति की अनिश्चितताओं और बदलती आपूर्ति शृंखलाओं के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारतीय व्यापार डेटा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि देश इन जटिलताओं के बीच भी अपनी क्षमता का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहा है। यह वृद्धि माल और सेवाओं दोनों के निर्यात में देखी गई ताकत का परिणाम है।

कौन सा क्षेत्र बना प्रमुख चालक?

सेवा निर्यात विकास का एक प्रमुख चालक बना हुआ है। अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान, सेवा निर्यात 354.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.57 प्रतिशत अधिक है, जब यह 320.28 अरब डॉलर था।

2024-25 में, सेवा निर्यात पहले ही 387.5 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जिससे 188.8 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ। इसने भारत को प्रौद्योगिकी, व्यवसाय और पेशेवर सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

माल निर्यात में विविध क्षेत्रों का योगदान

माल निर्यात के मोर्चे पर, विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात तेजी से बढ़ा है और यह सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, वस्त्र और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों ने भी निर्यात प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उल्लेखनीय है कि रक्षा निर्यात 2024-25 में रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो उच्च-मूल्य विनिर्माण में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।

विविधीकरण और व्यापार समझौते: निर्यात की रीढ़

भारत के निर्यात की मजबूती को उत्पादों और बाजारों में इसके विविधीकरण से भी बल मिला है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) के व्यापार विविधीकरण सूचकांकों के अनुसार, भारत उत्पाद विविधीकरण में शीर्ष पांच ग्लोबल साउथ अर्थव्यवस्थाओं और व्यापार साझेदारी विविधीकरण में शीर्ष तीन में शामिल है।



पिछले तीन वर्षों में, भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, जो 38 देशों को कवर करते हैं और लगभग 70 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद तक पहुंच का विस्तार करते हैं।

भविष्य की राह: मजबूत घरेलू विनिर्माण और वैश्विक साझेदारी

घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, व्यापार वित्त को बढ़ाने और वैश्विक साझेदारियों का विस्तार करने पर निरंतर जोर देने के साथ, भारत आने वाले महीनों में अपने निर्यात की गति को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में दिखाई देता है। महामारी के बाद के दौर में, भारत एक तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए अपनी घरेलू ताकत का लाभ उठा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत की विकास दर दुनिया के लिए ईर्ष्या का विषय है, जो एक स्वस्थ बैंकिंग प्रणाली, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और एक आरामदायक चालू खाता शेष द्वारा समर्थित है।






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