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GAIL ने रोकी गैस सप्लाई, बेंगलुरु का येलहंका पावर प्लांट बंद, क्या बढ़ेगा बिजली संकट?


India

oi-Bhavna Pandey

Yelahanka power plant gas supply stopped: कर्नाटक के बिजली तंत्र को बड़ा झटका लगा है। बेंगलुरु के पास येलहंका में स्थित राज्य का इकलौता गैस-आधारित बिजली संयंत्र अचानक बंद हो गया है। वजह है प्राकृतिक गैस की आपूर्ति रुकना। ऐसे समय में जब बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, इस संयंत्र के बंद होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

येलहंका गैस प्लांट ने बंद किया उत्पादन

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 370 मेगावाट क्षमता वाला येलहंका गैस आधारित बिजली संयंत्र 12 मार्च की सुबह से बिजली उत्पादन नहीं कर रहा है। यह संयंत्र कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) द्वारा संचालित है और गैस सप्लाई बंद होने के कारण फिलहाल पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है।

GAIL Gas Supply Stopped

नए गैस आपूर्ति नियम बने वजह

केंद्र सरकार द्वारा जारी ‘प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026’ के तहत गैस वितरण की प्राथमिकताओं में बदलाव किया गया है। इस नई व्यवस्था में बिजली उत्पादन को सबसे आखिरी प्राथमिकता दी गई है।

पहले घरेलू पाइप गैस कनेक्शन, एलपीजी उत्पादन, सीएनजी परिवहन नेटवर्क और पाइपलाइन संचालन को प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद उर्वरक उद्योग और फिर औद्योगिक-वाणिज्यिक उपभोक्ता आते हैं। बिजली संयंत्रों को गैस तभी मिलेगी जब इन सभी की जरूरत पूरी हो जाएगी।

क्यों खास है येलहंका प्लांट?

गैस आधारित बिजली संयंत्रों की खासियत है कि ये बहुत जल्दी चालू और बंद हो सकते हैं। इसलिए जब अचानक बिजली की मांग बढ़ती है या सौर-पवन ऊर्जा में उतार-चढ़ाव आता है, तब ऐसे प्लांट ग्रिड को संतुलित करने में मदद करते हैं। येलहंका प्लांट खास तौर पर बेंगलुरु के बिजली नेटवर्क को सपोर्ट करता है और दिसंबर 2025 से लगातार चल रहा था।

राज्य में बिजली मांग कितनी?

फिलहाल कर्नाटक में रोजाना करीब 355 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हो रही है। येलहंका प्लांट बंद होने के बावजूद राज्य अभी कोयला आधारित ताप बिजली, पनबिजली परियोजनाओं, सौर-पवन ऊर्जा और केंद्रीय ग्रिड से खरीद के जरिए मांग पूरी कर पा रहा है।

दूसरे राज्यों से भी ली जा रही बिजली

ग्रिड स्थिर बनाए रखने के लिए कर्नाटक पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों से बिजली खरीद भी कर रहा है। यह व्यवस्था बिजली विनिमय प्रणाली के जरिए की जा रही है ताकि सप्लाई में कोई बड़ा व्यवधान न आए।

वैश्विक हालात भी जिम्मेदार

प्राकृतिक गैस की कमी के पीछे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चल रही उथल-पुथल भी बड़ी वजह है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों को ईंधन वितरण में प्राथमिकताएं तय करनी पड़ रही हैं।

क्‍या बोले विशेषज्ञ?

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि गैस आधारित संयंत्र बड़े शहरों में “पीकिंग स्टेशन” की तरह काम करते हैं। यानी अचानक बढ़ी मांग को संभालते हैं। अगर गैस की कमी लंबे समय तक बनी रही और बिजली की मांग बढ़ी, तो कुछ इलाकों में दबाव या स्थानीय स्तर पर बिजली प्रबंधन करना पड़ सकता है।

सरकार रख रही है नजर

फिलहाल कर्नाटक ऊर्जा विभाग हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। राज्य और केंद्र की एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि गैस की कमी के बावजूद कर्नाटक में बिजली आपूर्ति स्थिर और बिना रुकावट जारी रहे।



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