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Gold-Silver Price: चांदी की कीमतों में करीब 5380 रुपये का उछाल; सोना ₹1.41 लाख पर पहुंचा, जानें ताजा अपडेट


Sone Chandi ka Aaj ka Rate:  सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने फिर से बुलियन में खरीदारी बढ़ाई। चांदी की कीमत 5380 रुपये बढ़कर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1320 रुपये बढ़कर 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

वैश्विक बाजार में सोने-चांदी का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट थमती नजर आई और दोनों धातुएं हल्की बढ़त के साथ कारोबार करती दिखीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ समझौते की समयसीमा को एक बार फिर आगे बढ़ाने के फैसले से बाजार को अस्थायी राहत मिली है।

कॉमेक्स पर सोना 0.33% बढ़कर 4,423 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में इसमें करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं चांदी की कीमत 0.29% बढ़कर 68.13 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।

क्यों थमी गिरावट?

डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई को फिलहाल 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है। इससे निवेशकों की घबराहट कुछ कम हुई है, क्योंकि पिछले एक महीने से जारी संघर्ष ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रखी थी।

फिर भी क्यों दबाव में हैं दाम?

हालांकि, सोना और चांदी पर दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं-


  • ऊंची ब्याज दरों की आशंका: ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई का खतरा बढ़ा है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं। इससे बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोना-चांदी की मांग घटती है।

  • मजबूत डॉलर: डॉलर इंडेक्स करीब 100 के स्तर पर बना हुआ है और संघर्ष शुरू होने के बाद इसमें लगभग 2.3% की बढ़त आई है। मजबूत डॉलर से कमोडिटीज महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग कमजोर पड़ती है।

  • तुर्की का गोल्ड सेल: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की के केंद्रीय बैंक ने संघर्ष के शुरुआती दो हफ्तों में करीब 60 टन सोना बेचा या स्वैप किया, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव आया।

एक महीने में बड़ा झटका

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक सोना करीब 17% तक गिर चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान सोना पारंपरिक सेफ हेवन की तरह व्यवहार करने के बजाय शेयर बाजार के साथ चलता दिखा और तेल की कीमतों के विपरीत दिशा में रहा।





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