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Gudi Padwa: जंग के बीज कैसी रही सोने-चांदी की खरीदारी? युवा ग्राहकों के बीच आभूषणों को लेकर बदल रहा ट्रेंड


पिछले साल गुड़ी पाड़वा के दिन सोने और चांदी की बिक्री में स्थिरता देखने को मिली, क्योंकि पिछले साल सोने की कीमतों में काफी तेजी थी, बावजूद इसके उपभोक्ताओं ने खरीदारी की थी, लेकिन इस साल परिस्थितियां बदली हुईं नजर आईं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल हुई है। ऊर्जा क्षेत्र में संकट के कारण एलपीजी और एलएनजी की बढ़ी कीमतों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि मौजूदा समय में सोने और चांदी की कीमतें पिछले कुछ दिनों से स्थिर बनी हुई है, यानी उनमें बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं आया है। इसके कारण ज्वेलर्स को उम्मीद थी कि गुड़ी पाड़वा को खरीदारी देखने को मिल सकती है। 

गुड़ी पाड़वा पर घरेलू ज्वेलरी की बिक्री रही न्यूट्रल 

कामा ज्वेलर्स के कॉलिन शाह कहते हैं, सोने की खरीदारी करना भारतीयों को पंसदीदा निवेश रहा है और गुड़ी पाड़वा जैसे शुभ मौके पर बड़ी संख्या में खरीदारी की जाती रही है।  इस साल, गुड़ी पाड़वा के दौरान घरेलू ज्वेलरी की बिक्री न्यूट्रल रही, भले ही लंबे समय के बाद सोने की कीमतों में गिरावट आई हो। हालांकि निवेशकों ने इस मौके का फायदा उठाया, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए उपभोक्ता वर्ग ने अपनी खरीदारी सर्तक रखी।

हल्के आभूषणों की खरीदारी देखने को मिली

शाह कहते हैं कि भले ही सोने की कीमतें थोड़ी कम हुई हों, बावजूद इसके हल्के आभूषणों की खरीदारी इस बार देखने को मिली। इसमें 9 कैरेट, 14 कैरेट और 18 कैरेट में सस्ती हल्के सस्ते सोने के आभूषणों की मांग युवा खरीदारों में बढ़ी। वे कहते हैं शादि ब्याह जैसी आवश्यक खरीदारी को छोड़ दें तो इस साल त्योहारों में बिक्री में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं होगी और कारोबार बड़े पैमाने पर न्यूट्रल रही। 

कैसे बदल रहा आभूषणों का ट्रेंड?

मिया बाय तनिष्क की बिजनेस हेड श्यामला रामानन ने कहा भारत का आभूषण बाजार धीरे-धीरे विकिसत हो रहा है, क्योंकि उपभोक्ता पारंपरिक अवसरों , त्योहारों पर खरीदारी किए जाने वाले आभूषणों के साथ ही रोजमर्रा के आभूषणों को भी अपना रहे हैं। यह बदलाव हमने युवा उपभोक्ताओं में देखा है, जो ऐसे बहुमुखी और किफायती आभूषणों की तलाश करते हैं, जिसे केवल विशेष अवसरों पर नही बल्कि रोजमर्रा पहना जा सकता है। रामानन कहती हैं कि रोजमर्रा के आभूषणों की बढ़ती मांग को देखते हुए हम युवा उपभोक्ताओं के लिए हल्के आभूषणों और नई डिजाइन को पेश कर रहे हैं। इस गुड़ी पाड़वा पर कई नई डिजाइन के साथ कई ऑफर भी उपलब्ध थे। 

उन्होंने आगे कहा कि हमारा मानना है कि आभूषणों के विकास का अगला चरण हल्के डिजाइनों, किफायती कीमतों से प्रेरित होगा। उन्होंने कहा कि हम 14 कैरेट सोने, 9 कैरेट सोने और चांदी के आभूषणों जैसी श्रेणियों में उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि पर ध्यान दे रहे हैं। हमने परंपारागत रूप से 14 कैरेट के आभूषणों पर ध्यान केंद्रीत किया है।

सोना त्योहारों और फाइनेंशियल प्लानिंग में दोहरी भूमिका निभाता रहेगा

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत के क्षेत्रीय सीईओ सचिन जैन ने कहा कि गुड़ी पाड़वा, उदगी, चेटी चंद, चैत्र नवरात्र से शुरू होने वाले त्योहारों का मौसम ऐसे समय आया, जब भारत में सोने की मांग में लगातार बदलाव और निरंतरता दोनों देखी जा रही है। जहां ऊंची कीमतें खरीदारी के फैसलों को बदल रही हैं। उपभोक्ता सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। जिसमें ग्राहक वैल्यू, फ्लेक्सिबिलिटी और सोच समझकर खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। 

मांग में दिखा मिश्रित रुख 

उन्होंने कहा कि हम मांग में एक मिश्रित रुख देख रहे हैं, जिसमें केवल आभूषण ही नहीं बल्कि सिक्के, ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड में उपभोक्ताओं की दिलचस्पी है। क्योंकि उपभोक्ता अब सोने को खपत और निवेश दोनों के नजरिए से देख रहे हैं। यह अधिक संतुलित नजरिए पेश करता है, जहां सोना एक बड़ी फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा बन रहा है और वो भी तब जब वैश्विक माहौल तेजी से बदल रहा है। उनका कहना है, हमें रिटलर्स से मिली खबरों से पता चलता है कि सोने की मांग स्थिर बनी हुई है और सोना त्योहारों और फाइनेंशियल प्लानिंग में दोहरी भूमिका निभाता रहेगा। 



होलसेल बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश बाफना कहते हैं, पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से बाजार में रौनक कम रही, हालांकि शादी-ब्याह जो कि अप्रैल से मई के बीच है, उनको लेकर खरीदारी देखी जा रही है। लेकिन सामान्य खरीदारी बाजार में कम हैं। उपभोक्ता अभी सतर्क होकर खरीदारी कर रहें हैं, अगर अमेरिका और ईरान का युद्ध लंबा हुआ तो कहीं न कहीं कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेगी और महंगाई भी बढ़ेगी। 



 




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