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HDFC बैंक संकट: चेयरमैन के इस्तीफे से मची खलबली, ₹1.52 लाख करोड़ का नुकसान; जानें सेबी ने क्या निर्देश दिए


देश के दूसरे सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व का संकट गहरा गया है। बैंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा दी है। इस विवाद से बैंक के शेयरों को भारी नुकसान पहुंचा है। पूंजी बाजार नियामक सेबी को भी इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। सेबी ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी है। यह स्थिति बैंक के प्रबंधन और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब बैंक कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस पूरे मामले को अब विस्तार से समझने की आवश्यकता है।

सवाल: एचडीएफसी बैंक में अचानक यह विवाद क्यों खड़ा हुआ?

जवाब: बैंक के अंतरिम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च 2026 को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 17 मार्च को गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी के चेयरमैन एच के भनवाला को लिखे पत्र में उन्होंने इसका कारण ‘मूल्य और नैतिकता’ बताया। चक्रवर्ती ने लिखा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर होने वाली कुछ गतिविधियां और प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक के किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने बीच में ही पद छोड़ा है, जिससे बैंक के कामकाज पर चिंताएं बढ़ गई हैं।

सवाल: इस इस्तीफे पर बैंक प्रबंधन और नए अंतरिम चेयरमैन की क्या प्रतिक्रिया है?

जवाब: बैंक प्रबंधन ने इस इस्तीफे को ‘हैरान करने वाला’ ‘बताया है, क्योंकि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद पूर्व नौकरशाह चक्रवर्ती ने कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं दिया। इस्तीफे के बाद अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किए गए एचडीएफसी बैंक समूह के दिग्गज केकी मिस्त्री ने कहा कि चक्रवर्ती और कार्यकारी नेतृत्व के बीच ‘संबंधों के मुद्दे’ हो सकते हैं। हालांकि, मिस्त्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस इस्तीफे के पीछे कोई ‘ठोस’ चिंता नहीं दिखी है और बैंक का संचालन व प्रशासन पूरी तरह स्थिर है।

सवाल: इस मामले में बाजार नियामक सेबी का क्या रुख है?

जवाब: सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को साफ किया कि स्वतंत्र निदेशकों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और बिना उचित सबूत और रिकॉर्डिंग के कोई भी आक्षेप नहीं लगाना चाहिए। बोर्ड बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पांडे ने कहा कि स्वतंत्र निदेशक अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों के रक्षक होते हैं और उन्हें चीजों को ‘अस्पष्ट’ नहीं रखना चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सेबी इस मामले के सभी पहलुओं की जांच करेगा और सभी तथ्यों को सामने लाएगा।

सवाल: इस पूरे विवाद का शेयर बाजार और निवेशकों पर क्या असर पड़ा?

जवाब: इस विवाद के कारण निवेशकों में चिंता फैल गई और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। 


  • तीन दिनों के भीतर बैंक के शेयरों में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। 

  • सोमवार को बीएसई पर यह हेवीवेट स्टॉक 4.70 प्रतिशत गिरकर 743.75 रुपये पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में यह 5 प्रतिशत टूटकर 52-सप्ताह के निचले स्तर 740.95 रुपये तक चला गया था। 

  • एनएसई पर स्टॉक 4.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 744.15 रुपये पर बंद हुआ। 

  •  इस 11.76 प्रतिशत की गिरावट के बाद कंपनी के बाजार मूल्यांकन में 1,52,064.22 करोड़ रुपये की भारी कमी आई है, जिससे यह घटकर 11,44,778.71 करोड़ रुपये रह गया है।

यह पूरा घटनाक्रम भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ा विषय बन गया है। सेबी की जांच से ही स्पष्ट हो पाएगा कि चक्रवर्ती की ‘नैतिकता’ संबंधी चिंताओं में कितनी सच्चाई है। फिलहाल, निवेशकों और बाजार की नजरें सेबी की जांच रिपोर्ट और बैंक के आगामी कदमों पर टिकी रहेंगी।





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