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oi-Sumit Jha
Strait of Hormuz China ships turned back: मिडल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक हैरान करने वाली खबर आई है। ईरान, जिसे रूस और चीन का करीबी साथी माना जाता है, उसने चीन की सरकारी कंपनी COSCO के दो विशालकाय जहाजों को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पार करने से रोक दिया।
इसके बाद इन जहाजों को बीच समंदर से यू-टर्न लेना पड़ा। दरअसल, चीन ने हाल ही में खाड़ी देशों के लिए अपनी बुकिंग दोबारा शुरू की थी, लेकिन ईरान के इस कदम ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नई उलझन पैदा कर दी है।

Iran China conflict: चीनी जहाजों को क्यों लेना पड़ा यू-टर्न?
चीन की कंपनी COSCO के दो बड़े जहाज, ‘CSCL इंडियन ओशन’ और ‘CSCL आर्कटिक ओशन’, होर्मुज के रास्ते आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। मरीन ट्रैफिक के डेटा के मुताबिक, इन जहाजों को वहां सुरक्षित रास्ते की गारंटी नहीं मिली, जिसके कारण इन्हें वापस मुड़ना पड़ा। यह पहली बार है जब युद्ध शुरू होने के बाद किसी बड़ी शिपिंग कंपनी ने इस रास्ते का इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन ईरान की सेना ने उन्हें रास्ता देने से इनकार कर दिया।
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Strait of Hormuz news: ईरान की सेना (IRGC) का सख्त रुख
ईरान की एलीट फोर्स ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ ने साफ कर दिया है कि यह समुद्री रास्ता उन सभी जहाजों के लिए बंद है जो अमेरिका, इजराइल या उनके सहयोगियों से किसी भी तरह जुड़े हैं। ईरान का कहना है कि चाहे कोई भी देश हो, अगर उसके जहाज इजराइली या अमेरिकी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं, तो उन्हें होर्मुज पार करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसी सख्ती की चपेट में चीन के जहाज भी आ गए।
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ट्रंप की चेतावनी और बदलती डेडलाइन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने की अपनी धमकी की समय-सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है। ट्रंप का दावा है कि ईरान समझौता करना चाहता है, इसलिए उन्होंने यह मोहलत दी है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने बातचीत के संकेत के तौर पर 10 तेल टैंकरों को वहां से गुजरने की अनुमति दी है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी शर्तों पर ही युद्ध खत्म करेगा और पीछे नहीं हटेगा।
आम नागरिकों को सुरक्षित रहने की सलाह
ईरान की सेना ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उन होटलों से दूर रहें जहां अमेरिकी सैनिक ठहरे हुए हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल आम लोगों का इस्तेमाल ढाल के तौर पर कर रहे हैं। इस बीच कुवैत के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमले की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान अब उन देशों को भी निशाना बनाने के संकेत दे रहा है जो अमेरिका की मदद कर रहे हैं।
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