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Hormuz Crisis: ईरान की नाकेबंदी से गहराया ऊर्जा संकट, रास्ता खुलने के तीन संभावित विकल्प क्या-क्या बचे?


पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को सकते में डाल दिया है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अघोषित रोक लगा दी है। इस कदम से दुनिया भर में पेट्रोलियम पदार्थों और गैस की किल्लत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान युद्धविराम के लिए नहीं मानता तो आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा।

आइए इस पूरे संकट और इसके समाधान के तीन संभावित परिदृश्यों  को समझते हैं।

सवाल:  होर्मुज में फिलहाल क्या स्थिति है और यह दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

जवाब: ईरान ने कई हफ्तों से एक भी भरे हुए एलएनजी कार्गो को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी है। सोमवार को कतर के दो एलएनजी टैंकरों को ईरानी अधिकारियों से मंजूरी न मिलने के कारण कुछ ही घंटों के भीतर ‘यू-टर्न’ लेकर वापस लौटना पड़ा। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक भरे हुए एनएनजी टैंकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। यह मार्ग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की कुल एलएनजी आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया का 25 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार (लगभग 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन) इसी पर निर्भर है। यह जलडमरूमध्य केवल 29 समुद्री मील चौड़ा है और इसका नेविगेशन चैनल पूरी तरह से ईरानी जलक्षेत्र में आता है।

सवाल: ईरान की इस नाकेबंदी का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ रहा है?

जवाब: इस संकट ने ऊर्जा बाजार को संभावित अधिकता से निकालकर भारी कमी की ओर धकेल दिया है। कतर को अपने विशाल ‘रास लाफन’ निर्यात संयंत्र को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। गैस न मिलने के कारण जापान और बांग्लादेश जैसे देश अब वापस कोयले जैसे अधिक प्रदूषणकारी ईंधन का रुख कर रहे हैं, जबकि ताइवान ने एलएनजी की सुरक्षा के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। इसी का नतीजा है कि मार्च में वैश्विक एलएनजी निर्यात अपने छह महीने के निचले स्तर पर आ गया है।

सवाल: क्या भारत या अन्य देशों को इस रास्ते से गुजरने की कोई छूट मिली है?

जवाब: हां, फंसे हुए तेल टैंकरों की सुरक्षित निकासी के लिए भारत, पाकिस्तान और थाईलैंड ने ईरान के साथ कुछ समझौते किए हैं। हाल ही में जापान और फ्रांस से जुड़े जहाजों को भी इस रास्ते से गुजरने की अनुमति मिली है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी भी भरे हुए एनलएनजी जहाज या कतर के पोत को अब तक निकलने की अनुमति नहीं मिली है।

सवाल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस मसले पर क्या रुख है?

जवाब: राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि होर्मुज को फिर से खोलना एक बहुत बड़ी प्राथमिकता है। उनका कहना है कि नेविगेशन की स्वतंत्रता ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने वाले किसी भी समझौते का अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिए। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान जलडमरूमध्य को नहीं खोलता है, तो अमेरिका अपना सैन्य हमला और तेज करेगा। मंगलवार को अपनी धमकियों की कड़ी में ट्रंप ने एक रात में ही पूरी सभ्यता खत्म करने की चेतावनी दे डाली।

सवाल: अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के क्या संभावित विकल्प हैं?

जवाब: वैश्विक मामलों जानकार और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के डोनाल्ड रोथवेल के अनुसार रणनीतिक और सैन्य नजरिए से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए तीन संभावित स्थितियां हैं। 


  • पहली संभावना 

युद्धविराम और होर्मुज पर नया टोल टैक्स: पहला विकल्प यह है कि ईरान ट्रंप की मांगों के आगे झुक जाए और युद्धविराम हो जाए। हालांकि, इसके बाद ईरान विदेशी जहाजों से भारी टोल वसूलना शुरू कर सकता है। हाल ही में कुछ जहाजों पर ऐसे टोल लगाए जाने की खबरें भी आई हैं। शांति काल में टोल लगाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो खाड़ी क्षेत्र से होने वाले सभी निर्यातों की कीमतें बढ़ना तय है।


  • दूसरी संभावना

अमेरिकी सेना की जमीनी कार्रवाई: अमेरिका हवाई और मिसाइल हमलों से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई शुरू कर सकता है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के लगभग 50,000 सैनिक मौजूद हैं। रास्ता खोलने के लिए अमेरिका को अपने नौसैनिक बेड़े उतारने होंगे जो समुद्र में माइन्स को हटा सकें और व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट कर सकें। हालांकि, सहयोगी देशों का समर्थन न मिलने के कारण ट्रंप के लिए यह सैन्य और राजनीतिक जोखिम उठाना फिलहाल मुश्किल लग रहा है।


  • तीसरी संभावना

अमेरिका की ओर से युद्ध खत्म करने की घोषणा: तीसरा विकल्प यह है कि अमेरिका युद्ध समाप्त कर दे और अपनी सेना हटा ले, लेकिन सुरक्षित मार्ग का मसला अनसुलझा रहे। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) एक नया प्रस्ताव लाकर सदस्य देशों को सामूहिक नौसैनिक कार्रवाई की अनुमति दे सकता है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश, अमेरिकी सेना की वापसी के बाद यूएन के नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी उठा सकते हैं।



इन सभी संभावित विकल्पों से एक बात बिल्कुल साफ है कि होर्मुज में युद्ध से पहले वाली सामान्य स्थिति शायद अब कभी बहाल नहीं हो पएगी। ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इस अहम जलमार्ग पर उसका नियंत्रण हमेशा बना रहेगा और वैश्विक व्यापार को इसी नई भू-राजनीतिक सच्चाई के साथ आगे बढ़ना होगा।





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