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oi-Sumit Jha
Strait of Hormuz Crisis: हॉर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका दिया है। दुनिया की 20% ऊर्जा सप्लाई वाले इस रास्ते पर मचे घमासान के बीच पाकिस्तान के दो तेल टैंकर, ‘खैरपुर’ और ‘शालिमार’, बीच रास्ते से ही बैकरॉक (वापस) होने को मजबूर हो गए।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान खुद अमेरिका और ईरान के बीच शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही। नतीजा यह हुआ कि ‘शांति के उपासक’ पाकिस्तान की भारी बेइज्जती हो गई और उसके अपने जहाज सुरक्षित नहीं रह पाए।

US-Iran peace talks failure: शांतिदूत बनने चले थे,’मोय-मोय’ हो गया
पाकिस्तान वैश्विक राजनीति में अपनी धाक जमाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहा था। इस्लामाबाद में बड़ी उम्मीदों के साथ शांति वार्ता आयोजित की गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। जैसे ही बातचीत नाकाम हुई, ईरान ने कड़ा रुख अपना लिया। इसका सीधा असर पाकिस्तान के उन जहाजों पर पड़ा जो तेल लेने जा रहे थे। जब अपने ही जहाज वापस लौटने लगें, तो दुनिया भर में यह संदेश गया कि मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर पाकिस्तान की कोई वैल्यू नहीं रह गई है।
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Pakistan oil tankers Return: खैरपुर और शालिमार की ‘दुखद’ घर वापसी
पाकिस्तानी झंडे वाले तेल टैंकर ‘खैरपुर’ और ‘शालिमार’ बड़े जोश के साथ हॉर्मुज की ओर बढ़ रहे थे। उन्हें लगा था कि शांति वार्ता के बाद रास्ता साफ होगा, लेकिन हकीकत कुछ और निकली। समझौते की शर्तें पूरी न होने पर उन्हें बीच समुद्र से ही यू-टर्न लेना पड़ा। यह सिर्फ जहाजों की वापसी नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान की समुद्री साख की वापसी थी। सोशल मीडिया पर लोग इसे पाकिस्तान की भारी फजीहत बता रहे हैं, क्योंकि उसके टैंकरों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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ईरान-अमेरिका की जिद और बीच में फंसा पाकिस्तान
ईरान हॉर्मुज पर अपना पूरा कंट्रोल चाहता है, जबकि अमेरिका इसके खिलाफ है। 8 अप्रैल को हुआ संघर्ष विराम 15 दिन भी नहीं टिक सका। जब दो हाथियों की लड़ाई होती है, तो घास कुचली ही जाती है, यही हाल पाकिस्तान का हुआ है। पाकिस्तान को लगा था कि वह दोनों देशों को मना लेगा, लेकिन दोनों महाशक्तियों ने अपने हितों को ऊपर रखा। इस जिद के चलते पाकिस्तान के एनर्जी प्रोजेक्ट्स और तेल की सप्लाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
ऊर्जा संकट और अस्थायी राहत का खेल
हालांकि ‘MV Selen’ नाम का जहाज कराची पहुंच गया, लेकिन इसे ऊंट के मुंह में जीरे के समान माना जा रहा है। रणनीतिकारों का कहना है कि एक जहाज के आने से सप्लाई चेन नहीं सुधरेगी। अगर हॉर्मुज जलमार्ग इसी तरह बंद रहा या तनाव बना रहा, तो पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे। फिलहाल पाकिस्तानी अधिकारी अमेरिका और ईरान के आगे हाथ-पैर जोड़ रहे हैं कि कोई रास्ता निकले, वरना उनकी अर्थव्यवस्था का पूरी तरह ‘मोय-मोय’ होना तय है।
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