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IITian Baba Marriage: कौन हैं अभय सिंह की इंजीनियर दुल्हन? कहां हुई मुलाकात? कैसे चढ़ा इश्क परवान?


Uttar Pradesh

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IITian Baba Marriage: प्रयागराज महाकुंभ 2025 में सादगी, भगवा वस्त्र और गहरी आध्यात्मिकता के लिए वायरल हो चुके IITian बाबा अभय सिंह अब वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत कर चुके हैं।

बॉम्बे आईआईटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले इस युवा ने अपनी इंजीनियर पत्नी प्रतीका के साथ पहली बार हरियाणा के झज्जर स्थित पैतृक घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। महाकुंभ ने जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी, अब उसी सफर में प्रतीका भी उनके साथ हैं। आखिर कौन है दुल्हन प्रतीका? कहां और कैसे हुई मुलाकात?

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IITian Baba Abhey Singh Marriage: शिवरात्रि पर मंदिर में, फिर कोर्ट मैरिज

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में (Prayagraj Mahakumbh 2025) अभय सिंह को खाफी प्रसिद्धि मिली। अभय ने खुद सोमवार (6 अप्रैल 2026) को यह बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि दोनों ने 15 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के अघंजर महादेव मंदिर में विवाह किया। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी पूरी हो गई। झज्जर पहुंचकर अभय ने कहा, ‘हम दोनों अपनी जिंदगी से बेहद खुश हैं। अभी भी सादगी से रह रहे हैं। पत्नी प्रतीका मूल रूप से कर्नाटक की रहने वाली हैं और वे भी इंजीनियर हैं। हम फिलहाल हिमाचल की धर्मशाला में रह रहे हैं।’

Who Is Abhey Singh Engineer Bride Pratika: कौन हैं प्रतीका? अभय की इंजीनियर दुल्हन

प्रतीका खुद एक कुशल इंजीनियर हैं। अभय के साथ एक साल पहले उनकी मुलाकात हुई थी। प्रतीका ने अभय की सादगी, ईमानदारी और सच्चाई को सबसे बड़ा गुण बताया। उन्होंने कहा कि अभय बेहद सरल स्वभाव के हैं। हम दोनों अब सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

दंपति का सपना है कि सनातन यूनिवर्सिटी बनाना। जहां अध्यात्म और आधुनिक विज्ञान का सुंदर मेल हो। प्रतीका ने बताया कि हम चाहते हैं कि गुरु, साधक और ज्ञान चाहने वाले एक जगह इकट्ठा हों।

Abhey Singh का सफर: आईआईटी-कनाडा से संन्यास तक (Engineer To IITian Baba)

अभय सिंह झज्जर के सासरौली गांव के ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता कर्ण सिंह वरिष्ठ वकील और झज्जर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान हैं। शुरुआती शिक्षा झज्जर से पूरी करने के बाद अभय ने दिल्ली में कोचिंग ली और आईआईटी बॉम्बे में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।

कनाडा में एयरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में 3 लाख रुपये मासिक सैलरी वाली नौकरी की, लेकिन 2021 के लॉकडाउन के बाद सब बदल गया। भारत लौटकर उन्होंने फोटोग्राफी, यात्राएं (केरल, उज्जैन कुंभ) शुरू कीं। 2024 में अचानक परिवार से संपर्क तोड़ लिया। काशी में गुरु सोमेश्वर पुरी से मुलाकात के बाद महाकुंभ पहुंचे। वहां भगवा वेश में ‘आईआईटी बाबा’ के नाम से देश-विदेश में चर्चा बटोरी।

महाकुंभ ने बदली जिंदगी – अब नया मिशन

अभय ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आईआईटी जाने के बाद सवाल बदल गया। पैसे तो कमा लेंगे, लेकिन खुशी क्या देगी? धीरे-धीरे अध्यात्म की तरफ मुड़ गया। झज्जर में पिता के चैंबर पहुंचकर अभय भावुक हो गए। उन्होंने याद किया कि पहले यहां आकर पिता की एप्लीकेशन चेक किया करता था। अध्यात्म का सच समझ आया, लेकिन आगे क्या करना है, यह स्पष्ट नहीं था। अब पत्नी प्रतीका के साथ वे उसी मिशन ‘अध्यात्म और विज्ञान का संगम’ पर हैं। सनातन यूनिवर्सिटी उनका अगला बड़ा कदम है।

परिवार से पहली मुलाकात

पत्नी प्रतीका ही अभय को बैंक के KYC और परिवार से मिलने झज्जर लेकर आईं। अभय ने कहा कि शादी छिपाने वाली कोई बात नहीं थी। पत्नी ने ही मुझे यहां लाया। दंपति ने परिवार वालों से मिलकर खुशी जाहिर की। छोटी बहन कनाडा में रहती हैं, लेकिन अभय अब भारत में ही सनातन मूल्यों को मजबूत करने में जुटे हैं।

महाकुंभ की आध्यात्मिक ऊर्जा ने आईआईटी के टॉपर को संन्यासी बना दिया, और अब प्रतीका जैसी साथी ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है। अभय सिंह और प्रतीका की जोड़ी न सिर्फ व्यक्तिगत खुशी, बल्कि सनातन संस्कृति के भविष्य की भी मिसाल बन रही है। सादगी, शिक्षा और आस्था का यह अनोखा मेल देखकर लगता है। महाकुंभ ने सिर्फ अभय की जिंदगी नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों की दिशा भी बदल दी है।



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