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India-Finland: ‘भारत और फिनलैंड साझा मूल्यों वाले लोकतांत्रिक देश हैं’, रणनीतिक साझेदारी पर बोले पीएम मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के बीच नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है और भारत के लिए उनका स्वागत करना सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि अलेक्जेंडर स्टब एक प्रसिद्ध वैश्विक नेता होने के साथ-साथ सम्मानित विचारक और लेखक भी हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष आयोजित होने वाले रायसीना डायलॉग में राष्ट्रपति स्टब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं, जो भारत के लिए गर्व की बात है।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत को लेकर क्या कहा?

फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब ने भारत को दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में से एक बताते हुए कहा कि भारत यूरोप के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और उसकी व्यावहारिक तथा यथार्थवादी विदेश नीति दुनिया के लिए एक उदाहरण है।

स्टब ने कहा कि भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को थोड़ा-सा और भारतीय बनने की जरूरत है। उन्होंने नई दिल्ली और जल्द होने वाली मुंबई यात्रा का जिक्र करते हुए भारत के आर्थिक विकास को एक आर्थिक चमत्कार बताया।

भारत और फिनलैंड मिलकर वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम की मेजबानी करेंगे

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड साझा मूल्यों वाले लोकतांत्रिक देश हैं और दोनों देशों का लक्ष्य एक स्वस्थ और टिकाऊ ग्रह सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत और फिनलैंड मिलकर वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम की मेजबानी करेंगे, जिससे सतत विकास के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

विश्व में चल रहे संघर्ष को लेकर पीएम ने क्या कहा?

मोदी ने कहा कि दोनों देश कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं और इस बात पर सहमत हैं कि किसी भी मुद्दे का समाधान केवल सैन्य संघर्ष से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों को समाप्त करने और शांति स्थापित करने के हर प्रयास का भारत समर्थन करता रहेगा।

भारतीय छात्रों और पेशवरों के लिए फिनलैंड में अच्छा अवसर

प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापक माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए फिनलैंड में अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों के नवाचार तंत्र आपस में जुड़ेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक प्रशिक्षण, स्कूल-टू-स्कूल साझेदारी और भविष्य की शिक्षा पर शोध सहयोग को भी विस्तार देने पर सहमति बनी है।

डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी पर क्या बोले पीएम?

मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति स्टब की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है।



प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साझेदारी के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 6G दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेज किया जाएगा। इसके अलावा रक्षा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।

नोकिया और दूरसंचार नेटवर्क पर ये बोले पीएम

उन्होंने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि नोकिया के मोबाइल और दूरसंचार नेटवर्क ने भारत के लाखों लोगों को जोड़ा है। साथ ही फिनलैंड के वास्तुकारों के सहयोग से चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया गया और असम के नुमालीगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी बांस-से-बायोएथेनॉल रिफाइनरी भी दोनों देशों की साझेदारी का उदाहरण है।

इस अस्थिरता के दौर में भारत और यूरोप स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर रहे

प्रधानमंत्री ने वैश्विक हालात पर बात करते हुए कहा कि दुनिया इस समय अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, जहां यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक संघर्ष जारी हैं। ऐसे माहौल में भारत और यूरोप के बीच संबंधों का स्वर्णिम दौर शुरू हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2026 की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिससे व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।



दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है और आतंकवाद को हर रूप में समाप्त करना दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता है।





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