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Iran Frozen Funds: शांति वार्ता पर लगा ग्रहण! ईरानी पैसों पर से अमेरिका नहीं हटाएगा प्रतिबंध


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oi-Sumit Jha

Iran Frozen Funds: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक हलचल ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच, वित्तीय लेन-देन की एक खबर ने सनसनी फैला दी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका, कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमीं ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को मुक्त करने पर सहमत हो गया है। यह खबर एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र के हवाले से दी गई थी, जिससे लगा कि दशकों पुराने आर्थिक गतिरोध को सुलझाने की दिशा में कोई बड़ी सफलता मिली है।

हालांकि, वाशिंगटन ने तुरंत इस दावे को खारिज कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संपत्तियों को अनफ्रीज करने का फिलहाल कोई समझौता नहीं हुआ है। दावों और खंडन का यह दौर न केवल दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कूटनीतिक मेज पर समझौतों की राह अभी भी कितनी जटिल और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

Iran Frozen Funds

US Iran Assets: क्या है पूरा मामला?

ईरान की बहुत सारी रकम दुनिया के अलग-अलग बैंकों में ‘फ्रीज’ यानी फंसी हुई है। प्रतिबंधों की वजह से ईरान इन पैसों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। हाल ही में यह चर्चा शुरू हुई कि अमेरिका मानवीय आधार पर इस पैसे को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया कि कतर के बैंकों में रखे गए पैसों को लेकर दोनों देशों के बीच गुपचुप तरीके से कोई बड़ी डील हुई है, जिससे ईरान को बड़ी राहत मिल सकती है।

Islamabad Peace Talks: ईरान का दावा और उम्मीद

ईरान की ओर से आए बयानों में काफी सकारात्मकता देखी गई। वहां के एक बड़े अधिकारी ने संकेत दिए कि बातचीत सफल रही है और जल्द ही उन्हें अपनी रुकी हुई संपत्ति मिल जाएगी। ईरान का मानना है कि यह पैसा उनका हक है और इसकी मदद से वे अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था और बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी इस फंसी हुई रकम को वापस पाने की मांग उठाता रहा है।

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अमेरिका की सफाई और इनकार

जब यह खबर आग की तरह फैली, तो अमेरिकी प्रशासन ने तुरंत अपनी स्थिति साफ की। एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संपत्तियों को अनफ्रीज करने की रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं है। अमेरिका का कहना है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध अभी भी प्रभावी हैं और जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, पैसा जारी नहीं किया जाएगा। वाशिंगटन ने इसे महज एक अफवाह या समय से पहले दी गई जानकारी करार दिया है।

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रिश्तों पर इसका असर

इस तरह की विरोधाभासी खबरों से दोनों देशों के बीच का अविश्वास और गहरा जाता है। एक तरफ जहां ईरान समझौते की उम्मीद कर रहा है, वहीं अमेरिका का कड़ा रुख दिखाता है कि राह इतनी आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि पर्दे के पीछे बातचीत तो चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला होने तक कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है। इस बयानबाजी का असर वैश्विक तेल बाजार और मध्य-पूर्व की राजनीति पर भी पड़ सकता है।



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