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oi-Sumit Jha
Iran-Israel conflict status: ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली ने पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव पर ईरान का कड़ा रुख साफ कर दिया है। समाचार एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इस युद्ध का अंत अपनी शर्तों पर करेगा। उन्होंने भारतीय जहाजों की सुरक्षा, अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना और भारत की मध्यस्थता की भूमिका पर भी विस्तार से बात की।
ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली ने जोर देकर कहा कि ईरान “झुकने” के बजाय “प्रतिरोध” के रास्ते को चुन चुका है, क्योंकि उनके अनुसार हार मानने की तुलना में संघर्ष की कीमत कम है।

West Asia tension Update In Hindi: युद्ध कब खत्म होगा?
राजदूत फथाली के अनुसार, युद्ध के खत्म होने की समयसीमा पूरी तरह ईरान की शर्तों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जब तक हमलावर पक्ष आक्रामक कार्रवाई पूरी तरह बंद नहीं करता और भविष्य में ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति न होने की ठोस गारंटी नहीं देता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ईरान का मानना है कि इस युद्ध की शुरुआत उन्होंने नहीं की थी, लेकिन इसका अंत वे अपनी रक्षात्मक नीतियों और ‘प्रतिरोध’ के सिद्धांत के साथ ही करेंगे।
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भारत की मध्यस्थता पर रुख
पश्चिम एशिया के हालातों को सुधारने में डॉ. फथाली ने भारत को एक ‘भरोसेमंद खिलाड़ी’ बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख देश के रूप में भारत की संतुलित विदेश नीति उसे तनाव कम करने के लिए एक विशेष स्थान देती है। भारत के सभी पक्षों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं, जिसका उपयोग गलतफहमियों को दूर करने और कूटनीतिक रास्तों को फिर से खोलने के लिए किया जा सकता है।
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Strait of Hormuz ship movement: हॉर्मुज जलडमरूमध्य और भारतीय जहाज
हॉर्मुज की खाड़ी में भारतीय जहाजों की स्थिति पर राजदूत ने कहा कि यह रास्ता सबके लिए बंद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल हमलावर देशों (अमेरिका और इजरायल) के जहाजों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत रोका जा रहा है। भारतीय जहाजों को लेकर जो भी मामले सामने आए हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है और कई को सुरक्षित रास्ता दिया जा चुका है। उन्होंने देरी के लिए विरोधियों द्वारा पैदा की गई अस्थिरता को जिम्मेदार ठहराया।
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ट्रंप की चेतावनी और बातचीत
डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम और बातचीत के दावों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। राजदूत ने कहा कि अमेरिका के साथ वर्तमान में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। उनके अनुसार, ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट केवल बाजार को प्रभावित करने की कोशिश हैं। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका के व्यवहार में वास्तविक बदलाव नहीं आता और वह ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमले बंद नहीं करता, तब तक कूटनीति का कोई आधार नहीं है।
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