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oi-Sumit Jha
Captain Ashish Kumar Iran Israel War: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब समुद्र में काम करने वाले बेगुनाह नाविकों के लिए काल बन रही है। ओमान की खाड़ी और लाल सागर, जो दुनिया के बड़े व्यापारिक रास्ते हैं, अब युद्ध के मैदान में बदल चुके हैं। यहां अक्सर मिसाइल और ड्रोन से जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।
इसी अंतरराष्ट्रीय लड़ाई की आग बिहार के बेतिया (पश्चिम चंपारण) तक पहुंच गई है। ओमान की खाड़ी में जा रहे एक तेल टैंकर ‘स्काई-लाइट’ पर हुए भयानक हमले ने एक भारतीय जांबाज कैप्टन आशीष कुमार की जान ले ली है। इस खबर ने न केवल बिहार को झकझोर दिया है, बल्कि युद्ध की विभीषिका को भी सबके सामने ला दिया है।

Who is merchant navy captain ashish kumar: कौन थे बेतिया के कैप्टन आशीष कुमार?
बेतिया के शिक्षक नगर के रहने वाले आशीष कुमार पिछले 16 सालों से इंडियन मर्चेंट नेवी में अपनी सेवा दे रहे थे। उनके पिता अशोक कुमार पेशे से वकील हैं और आशीष अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। 22 फरवरी 2026 को ही उन्हें ‘स्काई-लाइट’ नाम के बड़े तेल टैंकर की कमान सौंपी गई थी। आशीष न केवल अपने परिवार का सहारा थे, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व की बात थे। उनकी मेहनत और काबिलियत ने ही उन्हें जहाज का कैप्टन बनाया था।
Israel Iran War Update: ईरान-इजराइल जंग की चपेट में कैसे आए?
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे तनाव में अमेरिका भी शामिल है। ये देश एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए समुद्र से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहे हैं। कैप्टन आशीष का जहाज भी इसी दुश्मनी का शिकार हो गया। ओमान की खाड़ी में जब उनका जहाज गुजर रहा था, तभी ईरान की ओर से दागी गई एक मिसाइल सीधे उनके टैंकर से टकरा गई। यह हमला इतना अचानक था कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
Bihar Captain Ashish Kumar: धमाके और आग में झुलसकर हुई मौत
जिस समय मिसाइल जहाज से टकराई, कैप्टन आशीष जहाज के नीचे वाले हिस्से यानी ‘इंजन रूम’ में मौजूद थे। धमाका इतना जोरदार था कि जहाज के उस हिस्से में तुरंत भीषण आग लग गई। इंजन रूम में फंसे होने के कारण आशीष बाहर नहीं निकल पाए और आग की चपेट में आ गए। शुरुआत में उनके लापता होने की खबर आई थी, जिससे परिवार को उनकी सलामती की उम्मीद थी, लेकिन बाद में ईमेल के जरिए उनकी मौत की सूचना ने सबको तोड़ दिया।
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मासूम बेटा और परिवार का बुरा हाल
आशीष ने आखिरी बार 28 फरवरी को अपनी पत्नी अंशु और मां सुनीता देवी से व्हाट्सएप कॉल पर बात की थी। उस समय उन्होंने सब कुछ ठीक बताया था। उनका 5 साल का छोटा बेटा दक्ष आज भी दरवाजे पर खड़ा होकर अपने पिता का इंतजार कर रहा है। उसे यह भी नहीं पता कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे। उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा घर इस समय गहरे मातम में डूबा हुआ है।
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सरकार से मदद और अंतिम विदाई की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। परिजनों ने सांसद के जरिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जाए। परिवार चाहता है कि कैप्टन आशीष के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके घर बेतिया लाया जाए। पूरे इलाके के लोग इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं।



