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oi-Bhavna Pandey
Iran Israel War: पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्र में खुला सैन्य टकराव शुरू हो गया है। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए।
इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। युद्ध अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी बेटी, पोते/नाते, बहू और दामाद की मौत हो गई। उनकी पत्नी, जो हमले में गंभीर रूप से घायल हुई थीं, ने भी बाद में दम तोड़ दिया।
ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव अब पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बड़ी चेतावनी दी है।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी – “ईरान के लिए बेहतर होगा सरेंडर कर दे
युद्ध के तीसरे दिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रहा है और उसका मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करना है। ट्रंप ने कहा कि कार्रवाई के लिए यही सही मौका था। उनका आरोप था कि ईरान लगातार सच छिपा रहा है और गुमराह कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि उसके खिलाफ लंबा अभियान चलाया जाएगा, जिसे पूरी दुनिया देखेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के लिए बेहतर यही होगा कि वह आत्मसमर्पण कर दे।
ट्रंप बोले- ईरान को परमाणु ताकत बनने नहीं दे सकते
ईरान ने कहा कि ईरान के पास लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता मौजूद है और यदि उसे परमाणु हथियार मिल जाता है तो यह अमेरिकी नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उनका कहना था कि किसी ऐसे देश को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती, जिस पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हों। उनके मुताबिक, यदि ईरान के पास ऐसा हथियार हुआ तो वह इसका इस्तेमाल दुनिया पर दबाव बनाने और अपनी शर्तें मनवाने के लिए कर सकता है।
ईरान ने चेतावनी को किया नजरअंदाज
ट्रंप ने कहा, “मैंने हमला करने से पहले ईरान को समझाया था, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होगा तो वह अमेरिकियों के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा। हम ऐसे देश को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते।”
“ऑपरेशन 4-5 हफ्ते चल सकता है”
ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 4 से 5 सप्ताह तक चल सकता है, हालांकि अमेरिका इससे ज्यादा समय तक कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरानी शासन अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी संगठनों को हथियार और वित्तीय सहायता न दे सके। उन्होंने दावा किया कि पहले एक समझौता लगभग तय हो गया था, लेकिन ईरान पीछे हट गया।
ओबामा पर पर भी निशाना
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर हमला करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल में किया गया समझौता “मूर्खतापूर्ण” था और उससे ईरान को कानूनी रूप से परमाणु हथियार हासिल करने की राह मिल सकती थी। ट्रंप ने दोहराया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका इस खतरे को समाप्त करेगा।
जमीनी सैनिक भेजने से इनकार नहीं
न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए बयान में ट्रंप ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक भी भेजे जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अपेक्षा से कहीं तेज कार्रवाई की है और आगे “बड़ी लहर” आने वाली है। CNN से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “हमने उन पर जोरदार मार करना शुरू भी नहीं किया है। बड़ा हमला जल्द ही आने वाला है।”
अमेरिकी युद्ध सचिव का दावा – “इतिहास का सबसे घातक अभियान”
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान पर हुए हमलों को “इतिहास का सबसे घातक, सबसे जटिल और सबसे सटीक हवाई अभियान” बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान का शासन पिछले 47 वर्षों से अमेरिका के खिलाफ एकतरफा युद्ध छेड़े हुए था।



