Homeउत्तराखंडIran Missile: कितने दिन और जंग में टिक पाएगा ईरान? रडार को...

Iran Missile: कितने दिन और जंग में टिक पाएगा ईरान? रडार को चकमा देने वाले मिसाइलों का स्टॉक बस 50% बचा


International

oi-Smita Mugdha

Iran Missile: मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को बदलने वाली सबसे बड़ी ताकत के रूप में ईरान की मिसाइल क्षमता उभरकर सामने आई है। 2022 के अनुमानों के अनुसार, क्रूज मिसाइलों को छोड़कर ईरान के पास 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं, जो उसे क्षेत्र का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल भंडार प्रदान करती हैं। पिछले एक दशक में ईरान ने अपनी मिसाइलों की सटीकता, रेंज और मारक क्षमता में बेहतरीन स्तर पर सुधार किया है।

ईरान की यह ताकत अब केवल सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आधुनिक युद्ध की रणनीति को भी बदल दिया है। पारंपरिक वायुसेना की सीमाओं के बावजूद, ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन (UAVs) के संयोजन से युद्ध को लंबा खींचने की क्षमता दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल उन देशों के लिए एक नया रास्ता खोलता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी शक्तियों को चुनौती देना चाहते हैं।

Iran Missile power

Iran Missile: ईरान की मिसाइल क्षमता घातक

अमेरिका और इजरायल जैसे देशों द्वारा किए गए शुरुआती हमलों में ईरान के कई कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब भी उसकी 50 प्रतिशत से अधिक मिसाइल क्षमता बरकरार है, जिससे वह लंबे समय तक युद्ध जारी रखने में सक्षम है। ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBMs), जिनकी रेंज लगभग 2,000 किलोमीटर तक है। ईरान के मारक मिसाल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।

Iran Missile Power: 1500 से 2000 किमी तक मारक मिसाइल

– खुर्रमशहर, इमाद और सज्जील जैसी मिसाइलें 1,500 से 2,000 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। इसके अलावा, ‘फतह’ हाइपरसोनिक मिसाइल, जिसकी गति ध्वनि से 15 गुना अधिक बताई जाती है।

– ये लंबी दूरी वाले घातक मिसाइल आधुनिक युद्ध में नई चुनौती पेश करती है। अमेरिका और इजरायल के लिए इसी वजह से ईरान को युद्ध में मात देना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

– इसके साथ ही, ज़ुल्फिकार, देजफुल, हाजी कासिम सुलेमानी और खैबर शिकन जैसी कम और मध्यम दूरी की मिसाइलें भी ईरान के शस्त्रागार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

– इन मिसाइलों की खासियत यह है कि इनके लॉन्चर मोबाइल होते हैं। इससे इन्हें जल्दी तैनात करना और हमले के बाद तुरंत स्थान बदलना संभव होता है। यही वजह है कि इन्हें नष्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

आयरन डोम और थाड जैसे एयर डिफेंस हुए फेल

ईरान के हमलों को रोकने के लिए थाड और आयरन डोम (Iron Dome) जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, ये सिस्टम हर हमले को रोकने में पूरी तरह सक्षम साबित नहीं हुए हैं। इसके अलावा, इन इंटरसेप्टर मिसाइलों की लागत काफी अधिक है, जिससे लंबे समय तक रक्षा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपनी मिसाइल रणनीति को केवल आक्रामक हथियार के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत निवारक (deterrence) के रूप में विकसित किया है।

अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ईरान की मिसाइल क्षमता और तकनीक ने काफी हद तक अमेरिका और इजरायल को भी सकते में डाल दिया है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments