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Iran-US War: 14 दिन के युद्धविराम पाकिस्तानी प्रस्ताव के पीछे Trump की स्क्रिप्ट? शरीफ की बेवकूफी से खुली पोल


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oi-Divyansh Rastogi

Iran-US War Ceasefire: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 7 अप्रैल 2026 की शाम को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर लगाई गई समय सीमा को 14 दिन बढ़ाने, ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य दो हफ्ते के लिए खोलने और सभी युद्धरत पक्षों से दो हफ्ते का युद्धविराम मानने की अपील की। पोस्ट में ट्रंप, जेडी वेंस, मार्को रुबियो, स्टिव विटकोफ और ईरानी नेताओं को टैग किया गया था।

पोस्ट पढ़कर लग रहा था कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति के लिए ईमानदार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। व्हाइट हाउस ने तुरंत पुष्टि की कि ट्रंप को प्रस्ताव की जानकारी है और जल्द जवाब आएगा। ईरान ने भी ‘सकारात्मक समीक्षा’ का संकेत दिया। लेकिन कुछ घंटों बाद ही पोस्ट की एडिट हिस्ट्री सामने आई और पूरी तस्वीर बदल गई।

Iran US Ceasefire

‘ड्राफ्ट – Pakistan’s PM Message on X’: एक छोटी-सी भूल ने खोली पोल

प्रसिद्ध पत्रकार रयान ग्रिम (@ryangrim) ने तुरंत स्क्रीनशॉट शेयर किया। शरीफ की मूल पोस्ट में सबसे ऊपर यह लाइन थी- Draft – Pakistan’s PM Message on X’ यह लाइन पोस्ट करने के कुछ मिनट बाद डिलीट कर दी गई। ग्रिम ने लिखा कि पाकिस्तान के अपने स्टाफ शरीफ को ‘Pakistan’s PM’ नहीं कहते। वे तो ‘Prime Minister’ कहते। यह भाषा अमेरिका और इजरायल की स्टाइल है। शरीफ को जो कुछ भेजा गया था, उसे कॉपी-पेस्ट कर दिया और ड्राफ्ट हेडर हटाना भूल गए। इसके बाद सोशल मीडिया में शरीफ बुरी तरह ट्रोल हो गए। यूजर्स ने लिखा कि-

  • ‘ट्रंप को TACO (Trump Always Chickens Out) करना था, तो पाकिस्तान को स्क्रिप्ट भेज दी।’
  • ‘मध्यस्थता नहीं, वाशिंगटन से आई स्क्रिप्ट है।’
  • ‘शरीफ का स्टाफ भी उन्हें ‘Pakistan’s PM’ नहीं कहता… ये तो फॉरेन हैंडलिंग लग रही है।’

रयान ग्रिम की पोस्ट लाखों व्यूज और हजारों रीपोस्ट्स के साथ वायरल हो गई।

ट्रंप का हाथ था या पाकिस्तान की स्वतंत्र पहल?

1. सबूत क्या कहते हैं?

एडिट हिस्ट्री से साफ है कि पोस्ट पूर्व-लिखित थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के आंतरिक स्टाइल में ऐसा ‘ड्राफ्ट’ हेडर नहीं होता। ‘Pakistan’s PM’ शब्दावली अमेरिकी कूटनीतिक कम्युनिकेशन का स्टैंडर्ड फॉर्मेट है। ग्रिम का स्क्रीनशॉट इस बात को पक्का करता है कि शरीफ ने बस ‘सेंड’ बटन दबाया। यह एक क्लासिक कॉपी-पेस्ट गलती थी।

Oh, this is unbelievable. The edit history on this tweet shows that Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif originally copied and pasted everything he was sent, including:

“*Draft – Pakistans PM Message on X*”

Now, obviously, Sharifs own staff dont call him “Pakistans PM,”… https://t.co/q0ls8pK0qd pic.twitter.com/lm2vSEElkb

— Ryan Grim (@ryangrim) April 7, 2026 “>

2. ट्रंप को फायदा क्यों?

ट्रंप ने रात 8 बजे (ET) की डेडलाइन दी थी और हमले की धमकी दी थी। लेकिन अब पाकिस्तान के जरिए एक फेस-सेविंग एग्जिट मिल गया। अगर ईरान होर्मुज खोल दे तो ट्रंप कह सकते हैं कि मेरा दबाव काम आया। अगर ईरान मना कर दे तो, दोष पाकिस्तान या ईरान पर डाला जा सकता है। कई यूजर्स इसे ‘TACO by proxy’ बता रहे हैं। यानी ट्रंप बैकडोर से पीछे हटने का रास्ता बना रहे थे।

3. पाकिस्तान की मजबूरी और रणनीति

पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक है। क्योंकि, उसका 90 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। बंद रहने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट, अफगानिस्तान के साथ तनाव और भारत से पुराना विवाद। आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ट्रंप के ‘फेवरेट फील्ड मार्शल’ माने जाते हैं। दोनों के बीच बैक-चैनल पहले से सक्रिय थे। पाकिस्तान सच में युद्धविराम चाहता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भारी असर पड़ रहा है। लेकिन एडिट हिस्ट्री से लगता है कि स्क्रिप्ट अमेरिका की तरफ से तैयार की गई थी और पाकिस्तान ने उसे आगे बढ़ाया।

4. क्या यह मध्यस्थता सिर्फ दिखावा थी?

सोशल मीडिया पर बहस दो धड़ों में बंट गई:

एक पक्ष कह रहा है कि पाकिस्तान ने ट्रंप को पहले भी दो बड़ी कूटनीतिक जीत दिलाईं (2025 पाक-भारत संकट और अफगानिस्तान से संबंधित मामले)। यह तीसरी जीत हो सकती है।
दूसरा पक्ष इसे ‘प्रॉक्सी डिप्लोमेसी’ बता रहा है। असली मध्यस्थता नहीं, बल्कि ट्रंप के लिए फेस-सेविंग का माध्यम।

कुछ विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान की ‘भाईचारे’ वाली भाषा (Iranian brothers) असली है, लेकिन पोस्ट का फॉर्मेट अमेरिकी दबाव या सुझाव को दर्शाता है।

कूटनीति या स्क्रिप्टेड थिएटर?

शरीफ की एक छोटी-सी भूल ‘ड्राफ्ट हेडर न हटाना’ ने पूरी पोल खोल दी। 14 दिन का युद्धविराम प्रस्ताव अब ट्रंप की बैकडोर डिप्लोमेसी का हिस्सा लग रहा है। पाकिस्तान ने अपनी मध्यस्थ इमेज बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया की पारदर्शिता ने सब कुछ उजागर कर दिया।

अब बड़े सवाल ये हैं:

  • ट्रंप 14 दिन बढ़ाएंगे या सिर्फ समय खरीद रहे थे?
  • ईरान होर्मुज खोलेगा या अपनी स्थिति मजबूत रखेगा?
  • पाकिस्तान की ‘भाईचारे’ वाली मध्यस्थता कितनी स्वतंत्र और कितनी निर्देशित थी?





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