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oi-Sumit Jha
Iran vs America War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध की आग अब कतर तक पहुंच गई है, जिसके बाद कतर ने अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता देते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
संयुक्त राष्ट्र में कतर की प्रतिनिधि हिंद बिंत अब्दुल रहमान अल मुफ्ती ने साफ कर दिया है कि उनका देश इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनेगा। अमेरिका के लिए इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कतर ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने से मना कर दिया है।

Qatar response to Trump Iran strikes: तनाव के बीच कतर का ‘न्यूट्रल’ स्टैंड
कतर ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि वह शुरू से ही इस युद्ध से खुद को अलग रखना चाहता था। कतर के अनुसार, वे किसी भी ऐसी गतिविधि का समर्थन नहीं करेंगे जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़े। कतर ने साफ किया है कि वह एक शांतिदूत की भूमिका निभाना चाहता है, न कि किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनकर अपनी सुरक्षा को खतरे में डालना चाहता है। यह फैसला कतर की पुरानी तटस्थ रहने की नीति का हिस्सा है।
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Qatar Quit From War: ईरान के हमलों से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाया है जो सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं थे। कतर के अल उदैद एयर बेस और रास लफान जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों पर हुए हमलों ने दोहा की चिंता बढ़ा दी है। कतर का कहना है कि जो देश किसी का पक्ष नहीं ले रहे, उन पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है। इन हमलों ने कतर को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर किया है।
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Qatar quit from war iran us conflict: ट्रंप प्रशासन को लगा करारा झटका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर स्ट्राइक की घोषणा के बाद उम्मीद थी कि खाड़ी देश अमेरिका का साथ देंगे। लेकिन कतर के इस हालिया बयान ने वाशिंगटन की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। कतर ने अपनी जमीन से किसी भी हमले की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि अमेरिका अब कतर में मौजूद अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए आसानी से नहीं कर पाएगा।
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शांति और बातचीत की अपील
कतर हमेशा से विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाता आया है। अल मुफ्ती ने वैश्विक मंच से अपील की है कि युद्ध को बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना जाना चाहिए। कतर का मानना है कि इस संघर्ष के बढ़ने से पूरा मध्य पूर्व तबाह हो सकता है। इसीलिए कतर ने सरेंडर के बजाय सूझबूझ दिखाते हुए शांति का रास्ता चुना है ताकि वह अपने संसाधनों और जनता की सुरक्षा कर सके।
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