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Iran Vs America: विदेश मंत्री जयशंकर पर क्यों भड़कीं पाकिस्तानी नेता हिना रब्बानी, ईरान युद्ध के बीच बवाल


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oi-Sumit Jha

Jaishankar Hina Rabbani Khar Row: हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। विवाद की शुरुआत भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के लिए ‘दलाल’ शब्द का इस्तेमाल किया। जयशंकर ने यह बात ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता की खबरों पर टिप्पणी करते हुए कही थी।

इसके जवाब में पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और वहां के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान का मानना है कि भारत की यह भाषा कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है और क्षेत्र की शांति के लिए ठीक नहीं है।

Jaishankar Hina Rabbani Khar Row

Iran war mediation: जयशंकर का ‘दलाल’ वाला बयान

एक सर्वदलीय बैठक के दौरान एस. जयशंकर से पाकिस्तान और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने दो टूक कहा कि भारत इस मामले में शामिल नहीं है क्योंकि हम ‘दलाल राष्ट्र’ नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका 1981 से ही पाकिस्तान का इस्तेमाल करता आ रहा है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। जयशंकर के इस सख्त लहजे ने पाकिस्तान को बुरी तरह चुभा दिया है।

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हिना रब्बानी खार का पलटवार

पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने सोशल मीडिया पर जयशंकर की आलोचना करते हुए इसे ‘सियासी ड्रामेबाजी’ बताया। उन्होंने कहा कि यह देखकर दुख होता है कि पूरा इलाका (दक्षिण एशिया) ऐसे लोगों की सोच का बंधक बना हुआ है। हिना के मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी से माहौल खराब होता है। उन्होंने जयशंकर के शब्दों को गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि भारत को अपनी सोच और भाषा पर गौर करना चाहिए।

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पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने जयशंकर के बयान को ‘तिरस्कार’ के साथ खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की यह भाषा गहरी हताशा को दिखाती है। पाकिस्तान का तर्क है कि जब किसी के पास ठोस दलीलें नहीं होतीं, तब वह अपशब्दों का सहारा लेता है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक भूमिका निभाता रहेगा और भारत के ऐसे बयानों से उसकी कोशिशों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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विवाद की असली वजह: मध्यस्थता

इस पूरे झगड़े की जड़ पाकिस्तान की वह कोशिश है, जिसमें वह ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के लिए इस्लामाबाद में बातचीत कराना चाहता है। पाकिस्तानी नेता दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान युद्ध के मुद्दे पर उनकी भूमिका भारत से कहीं ज्यादा बड़ी है। भारत ने इसी दावे को सिरे से खारिज करते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर तंज कसा है, जिसे पाकिस्तान अपनी बेइज्जती मान रहा है।



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