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oi-Sumit Jha
Iran USA War News: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध अब एक निर्णायक मोड़ पर है। इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद, ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है। इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी रक्षा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव का ऐलान किया है।
ट्रंप ने अमेरिका की दिग्गज हथियार निर्माता कंपनियों के साथ बैठक कर सैन्य उत्पादन को चार गुना (4x) करने की योजना बनाई है। उनका लक्ष्य न केवल इजराइल की मदद करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका के पास किसी भी बड़े वैश्विक युद्ध से निपटने के लिए हथियारों का ‘अनंत’ जखीरा मौजूद रहे।

Iran vs USA weapons: क्या हथियारों की कमी से जूझ रहा है अमेरिका?
भले ही राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि अमेरिका के पास हथियारों का “अनंत” जखीरा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल और CNN की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के हमलों को रोकने के लिए अमेरिका ने अपने सबसे महंगे इंटरसेप्टर (Patriot और THAAD) इतनी तेजी से इस्तेमाल किए हैं कि अब उनके स्टॉक पर दबाव दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो अमेरिका के पास खुद की रक्षा के लिए भी मिसाइलों की कमी पड़ सकती है।
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रातों-रात लिया 4 गुना (4x) प्रोडक्शन का फैसला क्यों?
ईरान के पलटवार और घटते स्टॉक की खबरों के बीच ट्रंप ने अमेरिका की टॉप 7 डिफेंस कंपनियों (Lockheed Martin, Boeing, RTX आदि) के CEO के साथ एक इमरजेंसी मीटिंग की। इस बैठक में ‘Exquisite Class’ यानी सबसे आधुनिक हथियारों के उत्पादन को 400% (4 गुना) तक बढ़ाने का आदेश दिया गया। ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि यह “गुप्त तैयारी” पिछले तीन महीनों से चल रही थी। आदेश का मकसद साफ है-ईरान को यह दिखाना कि अमेरिका किसी भी कीमत पर घुटने नहीं टेकेगा, बल्कि और भी ज्यादा घातक हथियारों से जवाब देगा।
Trump 4x Production: क्या ईरान के सामने झुकेंगे ट्रंप?
ट्रंप की रणनीति शांति बल के माध्यम से रही है। 4 गुना उत्पादन का फैसला यह बताता है कि वे झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि फैक्ट्री से हथियार निकलकर युद्ध के मैदान तक पहुंचने में समय लगता है। क्या तब तक अमेरिका का मौजूदा स्टॉक टिक पाएगा? यही वह सवाल है जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं।
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UAE और खाड़ी देशों पर ‘आर्थिक बमबारी’
इस युद्ध की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका शिकार सिर्फ सैन्य ठिकाने नहीं हो रहे। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जो क्षेत्र का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है, अब अपनी सुरक्षा के लिए ईरान की अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा को ब्लॉक करने की तैयारी कर रहा है। इजराइल और अमेरिका के समर्थन में खड़ा UAE जानता है कि अगर ईरान की फंडिंग नहीं रुकी, तो पूरा मिडल ईस्ट जल उठेगा।



