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oi-Sumit Jha
Iran vs USA conflict: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। हिंद महासागर में स्थित अमेरिका के सबसे सुरक्षित सैन्य ठिकाने ‘डिएगो गार्सिया’ पर ईरान का मिसाइल हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वाशिंगटन और इजराइल के लिए एक सीधा अल्टीमेटम है।
4,000 किलोमीटर दूर स्थित इस बेस को निशाना बनाकर ईरान ने यह साबित कर दिया है कि उसकी पहुंच अब उसकी घोषित सीमा से कहीं ज्यादा है। इस अप्रत्याशित कदम ने न केवल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सोच में डाल दिया है, बल्कि मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा के समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।

Israel Iran war tensions: ईरान की गुप्त ताकत का खुलासा
अब तक दुनिया यही मानती थी कि ईरान की मिसाइलों की अधिकतम रेंज 2,000 किलोमीटर है। लेकिन डिएगो गार्सिया पर हमले की कोशिश ने इस धारणा को ध्वस्त कर दिया है। 4,000 किलोमीटर की दूरी तक मिसाइल दागने का मतलब है कि ईरान के पास ऐसी Intermediate Range Ballistic Missiles (IRBM) हैं, जिनकी जानकारी उसने अब तक छिपा कर रखी थी। यह तकनीकी छलांग अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
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डिएगो गार्सिया: अमेरिका का अभेद्य किला
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में अमेरिका का वह ‘अजेय’ ठिकाना है, जहां से वह पूरे एशिया और अफ्रीका पर नज़र रखता है। यहां भारी-भरकम B-52 बमवर्षक और परमाणु पनडुब्बियां तैनात रहती हैं। ईरान द्वारा इस बेस को चुनौती देना अमेरिका की वैश्विक सैन्य साख पर सीधी चोट है। अगर ईरान यहां तक पहुंच सकता है, तो इसका मतलब है कि अमेरिका का कोई भी रणनीतिक केंद्र अब उसकी मिसाइलों की ज़द से सुरक्षित नहीं रह गया है।
Donald Trump Middle East policy: इजराइल और खाड़ी देशों में खलबली
ईरान की इस बढ़ती मारक क्षमता ने इजराइल और सऊदी अरब जैसे देशों की नींद उड़ा दी है। अब तक इजराइल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम कम दूरी के खतरों के लिए तैयार था, लेकिन अब उन्हें दक्षिणी यूरोप तक मार करने वाली ईरानी मिसाइलों का सामना करने के लिए अपनी पूरी सुरक्षा नीति बदलनी होगी। ईरान की इस ‘रणनीतिक अस्पष्टता’ ने दुश्मनों के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल कर दिया है कि अगला हमला कहां से और कितनी दूरी से होगा।
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ट्रंप प्रशासन के सामने कठिन चुनौती
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ उन पर जवाबी कार्रवाई का दबाव है, तो दूसरी तरफ ईरान की इस नई ताकत ने युद्ध के जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है। क्या अमेरिका सरेंडर करेगा या सीधे युद्ध में कूदेगा? यह फैसला दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को प्रभावित करेगा। ईरान ने दिखा दिया है कि वह केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह गहरे समंदर में भी अमेरिका को टक्कर दे सकता है।
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