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oi-Sumit Jha
Iran vs USA War 2026: ईरान ने अपनी विध्वंसक सैन्य रणनीति से दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति, अमेरिका के आधुनिक डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ा दी हैं। ट्रंप के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दावों के विपरीत, ईरान की “सैचुरेशन अटैक” रणनीति ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका के अरबों डॉलर के पैट्रियट और थाड (THAAD) सिस्टम भी ईरान के ड्रोन झुंड और मिसाइलों के आगे बेबस हैं।
अब तक हजारों ड्रोन और 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी दबदबे को सीधी चुनौती दी है। IRGC की नई घोषणा कि वे अब केवल 1 टन (1000 किलोग्राम) से भारी वॉरहेड वाली मिसाइलों का इस्तेमाल करेंगे, अमेरिका के लिए एक सीधा चेतावनी है। ईरान के इन घातक हथियारों ने न केवल अमेरिका को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया है, बल्कि युद्ध के मैदान में उसकी सैन्य श्रेष्ठता के दावों की भी हवा निकाल दी है।

शाहेद-136: अमेरिका के खजाने पर भारी ‘सस्ता शिकारी’
ईरान का यह ‘कामिकेज’ ड्रोन अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। इसकी कीमत मात्र 20-35 हजार डॉलर है, लेकिन इसे गिराने के लिए अमेरिका को अपनी लाखों डॉलर की महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें बर्बाद करनी पड़ती हैं। हजारों की संख्या में लॉन्च होकर ये ड्रोन अमेरिकी रडार को भ्रमित कर देते हैं, जिससे असली मिसाइलों के लिए रास्ता साफ हो जाता है। इसने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को पूरी तरह भेद दिया है और अमेरिकी रक्षा बजट पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है।
फतह-1 और 2: वो ‘अनस्टॉपेबल’ हाइपरसोनिक मिसाइलें
फतह सीरीज की हाइपरसोनिक मिसाइलों ने अमेरिका और इजराइल के ‘अजेय’ होने के भ्रम को तोड़ दिया है। अविश्वसनीय रफ्तार और हवा में रास्ता बदलने की क्षमता के कारण इन्हें इंटरसेप्ट करना लगभग नामुमकिन है। हालिया हमलों में इसने इजराइल के हाई-वैल्यू कमांड सेंटरों को सटीक निशाना बनाकर यह साबित कर दिया कि अमेरिका का कोई भी आधुनिक कवच, चाहे वो कितना भी महंगा क्यों न हो, ईरान की इस नई तकनीक के सामने टिक नहीं सकता।
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खोर्रमशहर-4: ‘1 टन’ तबाही का नया पैमाना
ईरान की यह मिसाइल अब अमेरिका की नींद उड़ा रही है क्योंकि यह अपने साथ 1,000 किलो से ज्यादा का भारी विस्फोटक (वॉरहेड) ले जा सकती है। खोर्रमशहर-4 केवल एक हमला नहीं, बल्कि पूरे के पूरे अमेरिकी मिलिट्री बेस को मलबे में तब्दील करने की ताकत रखती है। ईरान की नई रणनीति अब केवल भारी मारक क्षमता पर केंद्रित है, जिससे एक ही सटीक प्रहार से दुश्मन के रणनीतिक हवाई अड्डों और बंदरगाहों को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
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खैबर शिकन: अमेरिकी ठिकानों का काल
ठोस ईंधन से चलने वाली ‘खैबर शिकन’ मिसाइल अपनी रफ्तार और अचूक सटीकता के लिए जानी जाती है। 1,450 किमी की लंबी रेंज के कारण यह खाड़ी में मौजूद अमेरिकी नौसेना और जमीनी ठिकानों को आसानी से निशाना बना रही है। इसका ‘मैन्यूवरेबल वॉरहेड’ अंतिम क्षणों में अपनी दिशा बदलकर अमेरिकी एयर डिफेंस को चकमा दे देता है। यही कारण है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बावजूद, अमेरिका ईरान के जवाबी हमले के खौफ से बाहर नहीं निकल पा रहा है।
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