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Islamabad: बच्चियों के खून से सने बैग और जूते लेकर ईरान पहुंचा पाकिस्तान, दुनिया को रुला देगी तस्वीरें


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oi-Siddharth Purohit

Islamabad: ईरान, शुक्रवार की देर रात तक इस्लामाबाद में होने वाली पीस टॉक में हिस्सा लेने को लेकर नहीं जाना चाहता था, वजह थी इजरायल के लेबनान पर हमले। लेकिन किसी तरह शनिवार की सुबह ये बात सामने आई कि ईरान इस्लामाबाद के लिए रवाना हो रहा है। पर उससे ज्यादा चर्चा में आई एक फोटो। दरअसल ईरानी डेलिगेशन जिसे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलिबाफ लीड कर रहे हैं उन्होंने प्लेन में उन बच्चियों के खून से सने स्कूल बैग, जूते और तस्वीरें रखवाईं जो मीनाब के तय्यबेह स्कूल पर हुए अमेरिकी हमलों में मारी गईं। ये अमेरिका के लिए इस युद्ध की सबसे शर्मनाक तस्वीर है। यह स्कूल ईरान के दक्षिणी होर्मोज़गन प्रांत के मिनाब शहर में रिवोल्यूशनरी गार्ड बेस के पास स्थित था, जिसे टॉमहॉक मिसाइल से निशाना बनाया गया था।

ट्वीट कर अमेरिका को दिखाया आईना

ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने X पर एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर में वे उन बच्चों की तस्वीरों को देखते हुए नजर आ रहे हैं, जो इस हमले में मारे गए थे। फोटो में हवाई जहाज की सीटों पर बच्चों के बैग, फूल और उनके हेडशॉट्स रखे गए थे। उन्होंने लिखा कि ये बच्चे पाकिस्तान में हो रही शांति वार्ता की उड़ान में उनके साथी थे।

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टॉमहॉक मिसाइल हमले में 165 से ज्यादा मौतें

इस हमले को लेकर अमेरिकी सेना की शुरुआती जांच में कहा गया है कि पुरानी खुफिया जानकारी के आधार पर यह हमला हुआ हो सकता है। 28 फरवरी को युद्ध के शुरुआती घंटों में हुए इस हमले में 165 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल थे। यह घटना पूरे क्षेत्र में गहरी संवेदनशीलता और आक्रोश का कारण बनी।

इस्लामाबाद में हो रही शांति वार्ता

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच अहम शांति वार्ता के लिए माहौल तैयार है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबफ़ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार सुबह इस्लामाबाद पहुंचा। इस बैठक को क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि पहले दौर की बातचीत के बाद शायद ईरान जिनेवा या फिर ओमान में बातचीत करने पर जोर दे।

कौन-कौन है डेलिगेशन में?

इस ईरानी प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा, राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और कानूनी विशेषज्ञों की टीमें शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत तभी शुरू होगी जब दूसरा पक्ष ईरान की पूर्व-शर्तों को स्वीकार करेगा। इससे साफ है कि ईरान इस वार्ता में सख्त रुख अपनाए हुए है।

पहले से तय मुद्दों पर भी नहीं बनी सहमति

बातचीत से कुछ घंटे पहले गालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर बताया कि दो अहम मुद्दों-लेबनान में सीजफायर और ईरान की फंसी हुई संपत्तियों की रिहाई-पर पहले सहमति बनी थी, लेकिन उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया। इससे वार्ता से पहले ही तनाव की स्थिति साफ नजर आती है।

ट्रंप ने जताया भरोसा, वेंस को दी शुभकामनाएं

इस बीच, Donald Trump ने इस वार्ता को लेकर विश्वास जताया। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance को शुभकामनाएं दीं, जो इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “यह एक बड़ी बात है।”

अमेरिका का सख्त बयान, होर्मुज पर नजर

ट्रंप ने वर्जीनिया के चार्लोट्सविले में मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमेरिका हालात पर नजर रखे हुए है। उन्होंने दावा किया कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर स्थिति में है। साथ ही उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द ही खुल जाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि “हम खाड़ी को खोलेंगे, चाहे ईरान साथ दे या नहीं।”

कुल मिलाकर क्या है स्थिति?

यह पूरी स्थिति दिखाती है कि एक तरफ जहां शांति वार्ता की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हालात और पुराने विवाद इसे बेहद जटिल बना रहे हैं। मिनाब हमले की यादें इस वार्ता को और ज्यादा संवेदनशील बना रही हैं, और अब पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में होने वाली इस बातचीत पर टिकी हुई है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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