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oi-Sumit Jha
MEA statement on Iran Israel War: ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ती जंग ने पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत की भी धड़कनें बढ़ा दी हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ शब्दों में अपनी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और युद्ध के बजाय ‘बातचीत और डिप्लोमेसी’ का रास्ता चुनने की अपील की है।
भारत के लिए यह स्थिति काफी नाजुक है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में मची हलचल का सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था और वहां रहने वाले लाखों भारतीयों पर पड़ता है। भारत ने जोर दिया है कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन न हो और आम नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाए।

कूटनीति और शांति की अपील
भारत ने स्पष्ट किया है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। MEA के मुताबिक, तनाव कम करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। भारत ने अपील की है कि सभी पक्ष पीछे हटें और ऐसे कदम न उठाएं जिससे पूरे क्षेत्र में आग फैल जाए। भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और देशों की क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) का सम्मान होना चाहिए। अगर बातचीत का सिरा टूटता है, तो इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।
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भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे ऊपर
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वहां मौजूद भारतीय मिशन लगातार नागरिकों के संपर्क में हैं। भारतीयों को अलर्ट रहने और स्थानीय सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि युद्ध की स्थिति में एक भी भारतीय को आंच न आए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी की जा सके।
अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर संकट
मिडिल ईस्ट में तनाव का मतलब है-महंगाई का खतरा। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इन्हीं इलाकों से मंगवाता है। अगर जंग लंबी खिंचती है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई महंगी हो जाएगी। इसके अलावा, सप्लाई चेन बाधित होने से खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। भारत की नजर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ जैसे व्यापारिक रास्तों पर है, क्योंकि यहां से होने वाला व्यापार रुकना हमारी इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका होगा।
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रणनीतिक संतुलन की चुनौती
भारत के लिए इज़राइल एक भरोसेमंद रक्षा पार्टनर है, तो ईरान के साथ हमारे पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते (जैसे चाबहार पोर्ट) हैं। ऐसे में भारत किसी एक का पक्ष लेकर दूसरे को नाराज नहीं कर सकता। भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति यहां कड़ी परीक्षा में है। सरकार की कोशिश है कि दोनों देशों के साथ अपने हितों को बचाते हुए मध्यस्थता या शांति का संदेश दिया जाए। इस संतुलित रुख के जरिए ही भारत वैश्विक पटल पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में अपनी बात रख रहा है।



