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oi-Sumit Jha
Iran New Supreme Leader: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का सत्ता के शिखर पर पहुँचना वैश्विक राजनीति में एक अप्रत्याशित मोड़ ले आया है। विडंबना यह है कि जिस उत्तराधिकार को लेकर आज दुनिया दंग है, उसके खिलाफ खुद अली खामेनेई ने मोर्चा खोल रखा था।
कथित तौर पर अपनी गुप्त वसीयत में खामेनेई ने मोजतबा की धार्मिक और राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाते हुए उन्हें इस पद के अयोग्य माना था। उन्हें डर था कि ‘वंशवाद’ का यह ठप्पा न केवल उनकी विरासत को कलंकित करेगा, बल्कि दशकों से सुलग रहे जन-आक्रोश को एक नई चिंगारी भी दे सकता है। आज पिता की उसी आशंका और मोजतबा के राज्याभिषेक के बीच, ईरान एक अनिश्चित भविष्य की दहलीज पर खड़ा है।

Mojtaba Khamenei Iran Supreme Leader: अनुभव और राजनीतिक कद की कमी
अली खामेनेई का मानना था कि उनके बेटे मोजतबा के पास देश चलाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव नहीं है। मोजतबा ने कभी भी किसी आधिकारिक सरकारी पद या कैबिनेट में काम नहीं किया था। उनका पूरा प्रभाव केवल अपने पिता के कार्यालय तक सीमित था। विशेषज्ञों के अनुसार, खामेनेई चाहते थे कि ईरान का नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति करे जिसने सार्वजनिक जीवन में अपनी योग्यता साबित की हो, न कि केवल ‘वंशवाद’ के आधार पर सत्ता हासिल की हो।
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Khamenei Death: धार्मिक योग्यता पर संदेह
ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर बनने के लिए एक उच्च स्तरीय धार्मिक विद्वान (मुजतहिद) होना अनिवार्य है। मोजतबा को एक ‘युवा धर्मगुरु’ माना जाता है, जिनके पास वरिष्ठ आयतुल्लाहों जैसा धार्मिक सम्मान और ज्ञान नहीं है। अली खामेनेई को संदेह था कि ईरान की शक्तिशाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ और वरिष्ठ मौलवी मोजतबा को अपना नेता स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे देश के धार्मिक ढांचे में दरार पड़ सकती है और उनकी स्वीकार्यता पर सवाल उठेंगे।
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वंशवाद के आरोपों का डर
1979 की इस्लामी क्रांति का एक मुख्य उद्देश्य राजशाही और वंशवाद (Dynasty) को खत्म करना था। अली खामेनेई को डर था कि यदि उनका बेटा ही उनका उत्तराधिकारी बनता है, तो यह क्रांति के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इससे जनता के बीच यह संदेश जाता कि ईरान फिर से एक ‘राजशाही’ की ओर बढ़ रहा है। वे नहीं चाहते थे कि उनके परिवार पर सत्ता पर कब्जा करने के आरोप लगें, जिससे उनके शासनकाल की छवि धूमिल हो।
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World News Hindi: ‘कठपुतली’ बनने की आशंका
रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई यह भांप चुके थे कि शक्तिशाली सैन्य संस्था IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) मोजतबा का समर्थन इसलिए कर रही है क्योंकि उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अली खामेनेई चाहते थे कि सुप्रीम लीडर एक स्वतंत्र और शक्तिशाली निर्णय लेने वाला व्यक्ति हो। उन्हें डर था कि मोजतबा के नेतृत्व में असली ताकत सेना के हाथ में चली जाएगी और उनका बेटा महज एक ‘कठपुतली’ बनकर रह जाएगा।
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