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oi-Divyansh Rastogi
Khamenei Five Mistakes of Death Reason: 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों (Operation Epic Fury) में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (86) की मौत हो गई। यह हमला उनके कंपाउंड पर हुआ, जहां वे टॉप सिक्योरिटी ऑफिशियल्स के साथ मीटिंग में थे। खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, पोते-पोतियां, बहू और अन्य परिवारजन मारे गए। उनकी बीवी मंसूरेह खोजस्तेह बगेरजादेह घायल हुईं और 2 मार्च को अस्पताल में दम तोड़ दिया। कुल मिलाकर खामेनेई की फैमिली की कई पीढ़ियों का खात्मा हो गया।
ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपूर, डिफेंस मिनिस्टर और अन्य हाई-रैंकिंग लोग भी मारे गए। ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। 8-9 मार्च 2026 को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (56) को नया सुप्रीम लीडर चुना, जो हार्डलाइनर माने जाते हैं। लेकिन खामेनेई की मौत से साफ है कि कई रणनीतिक चूकें हुईं, जिन्होंने दुश्मनों को मौका दिया। यहां वो 5 प्रमुख गलतियां हैं, जो सामने आई हैं…

1. सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी पर अंधभरोसा-डेथ ट्रैप में फंसना
खामेनेई ने सिक्योरिटी काउंसिल के एडवाइजर अली शमखानी और IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपूर से मीटिंग के लिए कंपाउंड में जाने का फैसला किया। रिपोर्ट्स (खलीज टाइम्स और इंटेलिजेंस सोर्सेज) के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका शमखानी की हर मूवमेंट पर नजर रख रहे थे। जून 2025 में भी शमखानी पर अटेम्प्ट हुआ था, लेकिन वे बच गए। इस बार खामेनेई ने शमखानी के जरिए मीटिंग फिक्स की, जो इंटेलिजेंस लीक का जरिया बन गया। दुश्मनों ने इसी मीटिंग को टारगेट किया। अगर खामेनेई ने सलाहकारों पर इतना भरोसा न किया होता, तो शायद यह ट्रैप बच जाता।
2. सुरक्षित बंकर में न जाना-खुले में रहना सबसे बड़ी चूक
युद्ध के बढ़ते खतरे के बावजूद खामेनेई बंकर या हाई-सिक्योरिटी लोकेशन पर नहीं गए। उनके कंपाउंड में सिक्योरिटी थी, लेकिन वे खुद खुले में मीटिंग कर रहे थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वे अंडरग्राउंड बंकर में होते, तो प्रिसिजन स्ट्राइक्स से बच सकते थे। लगातार अमेरिकी-इजरायली थ्रेट्स के बीच बेसिक सिक्योरिटी प्रोटोकॉल इग्नोर करना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
3. अमेरिका से वार्ता पर ज्यादा भरोसा-दुश्मनों को मौका मिला
खामेनेई ने चल रही कूटनीतिक बातचीत को गंभीरता से लिया और सोचा कि इससे डायरेक्ट अटैक रुक जाएगा। लेकिन दुश्मनों ने वार्ता के दौरान ही हमले का मौका चुना। कूटनीति में भरोसा करना अच्छा है, लेकिन सावधानी की कमी ने उन्हें कमजोर बनाया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इंटेलिजेंस ने वार्ता के पीछे की तैयारी को ट्रैक किया और हमले को टाइम किया।
4. परमाणु हथियार फतवे को कमजोरी समझा जाना
1990 के दशक में खामेनेई ने परमाणु हथियार बनाने पर फतवा जारी किया था कि ईरान कभी न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा। यह इंटरनेशनल इमेज सुधारने के लिए था, लेकिन इजरायल -अमेरिका ने इसे ईरान की मिलिट्री वीकनेस माना। इस फतवे ने ईरान को अटैक के लिए ज्यादा वल्नरेबल बना दिया। अगर न्यूक्लियर डिटरेंस मजबूत होता, तो शायद हमले की हिम्मत न होती।

5. युद्ध की अस्थिरता में पर्सनल सिक्योरिटी का गलत आकलन
बढ़ते तनाव और आक्रामक पॉलिसी के बावजूद खामेनेई ने रिस्क का सही अंदाजा नहीं लगाया। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बेसिक सिक्योरिटी, थ्रेट असेसमेंट और स्ट्रैटेजिक कैशन की कमी थी। वे हाई-रिस्क सिचुएशन में भी रूटीन मीटिंग्स कर रहे थे, जो घातक साबित हुई।
Mojtaba Khamenei Lessons: Iran के नए लीडर मोजतबा खामेनेई के लिए सबक?
यह हमला CIA (केंद्रीय खुफिया एजेंसी) और मोसाद की लंबे समय की इंटेलिजेंस ऑपरेशन का नतीजा था। ट्रैफिक कैमरा हैकिंग, ह्यूमन सोर्सेज और साइबर डिसरप्शन से खामेनेई की लोकेशन कन्फर्म हुई। हमले में 60 सेकंड में कई टारगेट्स हिट हुए। खामेनेई की मौत ने ईरान में पावर वैक्यूम पैदा किया, लेकिन मोजतबा को जल्द चुना गया। 9 मार्च को ईरान टीवी ने दावा किया कि इजरायल के हमले में मोजतबा जख्मी हुए। ऐसे में मोजतबा को पिता की इन गलतियों से सबक लेना होगा। सिक्योरिटी को प्राथमिकता दें, ट्रस्ट पर ज्यादा भरोसा न करें, रिस्क असेसमेंट सख्त रखें और डिटरेंस मजबूत करें। वरना इतिहास दोहराया जा सकता है।
यह घटना मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिक्स बदल रही है-ईरान रिटेलिएट कर रहा है, गल्फ देश प्रभावित हैं, और वैश्विक ऑयल मार्केट हिल गया है। शांति की उम्मीद कम है, लेकिन सिक्योरिटी की सीख बड़ी है।
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