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LPG Crisis : एलपीजी कालाबाजारी पर एक्शन, सरकार बोली- देशभर में 1.2 लाख छापे और 53 वितरक सस्पेंड


पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बीच घरेलू स्तर पर एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने प्रवर्तन कार्रवाइयां काफी तेज कर दी हैं।  पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि गैस आपूर्ति में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक देश भर में 1.2 लाख से अधिक छापे मारे जा चुके हैं और तेल विपणन कंपनियों ने अचानक निरीक्षण की गति बढ़ा दी है।

सुजाता शर्मा के बयान के अनुसार, इन सघन छापों के दौरान 57,000 से अधिक गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं, 950 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं और 229 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने सख्त कदम उठाते हुए 2100 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, 204 एलपीजी वितरकों पर भारी जुर्माना लगाया है और 53 वितरकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। केवल 9 अप्रैल 2026 को ही देशभर में 3800 से अधिक स्थानों पर छापे मारे गए, जिनमें लगभग 450 सिलेंडर जब्त किए गए।

वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन वितरकों के स्तर पर आपूर्ति बंद होने की कोई सूचना नहीं मिली है। सुजाता शर्मा ने बताया कि माल की हेराफेरी को रोकने के लिए ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (डीएसी) आधारित डिलीवरी में लगभग 92 प्रतिशत और ऑनलाइन बुकिंग में 98 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। औद्योगिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए फार्मा, खाद्य, पॉलिमर और इस्पात जैसे प्रमुख क्षेत्रों को मार्च 2026 से पहले की खपत का 70 प्रतिशत एलपीजी हिस्सा दिया जाएगा, जो कि 0.2 टीएमटी प्रति दिन की समग्र सीमा के अधीन होगा। इसके अलावा, 14 मार्च 2026 से अब तक लगभग 1,06,093 मीट्रिक टन वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री हो चुकी है। 

प्रवासी श्रमिकों और छात्रों को राहत देने के लिए राज्य सरकारों के माध्यम से 5 किलोग्राम वाले एफटीएल (एफटीएल) सिलेंडरों की आपूर्ति दोगुनी कर दी गई है। 23 मार्च 2026 से अब तक इन कमजोर समुदायों को 11 लाख ऐसे छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। 

इस घरेलू प्रबंधन के साथ-साथ, वैश्विक मोर्चे पर भी सरकार व्यापार और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। पश्चिम एशिया संकट के बीच अब तक 1,927 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वतन वापसी हो चुकी है। हालांकि, ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही अभी भी सीमित है, जहां युद्धविराम के बाद से सिर्फ 12 जहाज ही गुजर पाए हैं। वहीं, भारत ने लेबनान में नागरिकों की मौत पर भी गहरी चिंता जताई है, जहां लगभग 1,000 भारतीय नागरिक निवासरत हैं।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सरकार अब तक 1,927 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस ला चुकी है। इनमें से 124 नाविक पिछले 24 घंटों में ही लौटे हैं। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने शुक्रवार को अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई है। उन्होंने कहा, हम विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। हमारी प्राथमिकता नाविकों का कल्याण और समुद्री व्यापार को निर्बाध रखना है। शिपिंग मंत्री ने स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी बंदरगाहों और महानिदेशालय को निर्देश दिए हैं कि निर्यातकों या व्यापारियों को आ रही किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर कर व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखना है।

भारत ने लेबनान में नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई

भारत ने लेबनान में नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, खासकर इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को देखते हुए। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना आवश्यक है। लेबनान में लगभग 1,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। दो दिन पहले इस्राइली हमले में लेबनान में 300 से अधिक लोग मारे गए थे।





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