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LPG crisis India: कतर, यूएई या सऊदी अरब! कहां से आती है आपके घर की रसोई गैस? अब अमेरिका बनेगा सहारा!


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oi-Sumit Jha

LPG supply crisis India: पश्चिम एशिया में छिड़े भीषण युद्ध ने भारत की रसोई के बजट और ऊर्जा सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग, ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के 1 मार्च से बंद होने के कारण भारत की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी तनावग्रस्त क्षेत्र से आता है। घरेलू उत्पादन केवल 40% तक सीमित होने के कारण विदेशी निर्भरता अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।

खाड़ी देशों में फंसे शिपमेंट और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच, भारत अब अमेरिका जैसे वैकल्पिक रास्तों और घरेलू संसाधनों की ओर देख रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस संकट के पीछे के असल कारण क्या हैं।

LPG supply crisis India

Hormuz Strait closure news: सप्लाई का ‘बंद’ दरवाजा

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है। भारत को मिलने वाली अधिकांश LPG इसी संकरे रास्ते से होकर आती है। युद्ध के कारण 1 मार्च से इस मार्ग के बंद होने से गैस टैंकरों की आवाजाही ठप हो गई है। चूंकि भारत के मुख्य सप्लायर इसी क्षेत्र में स्थित हैं, इसलिए इस रास्ते का बंद होना भारत के लिए सीधे तौर पर फ्यूल संकट का संकेत है।

LPG crisis India: विदेशों पर भारी निर्भरता

भारत की सालाना LPG खपत लगभग 31.3 मिलियन टन है, जिसका 87% हिस्सा घरों में इस्तेमाल होता है। देश अपनी जरूरत का लगभग 62% हिस्सा आयात से पूरा करता है। पिछले दशक में ‘क्लीन कुकिंग’ अभियान के कारण यह निर्भरता तीन गुना बढ़ गई है। घरेलू उत्पादन मांग के मुकाबले काफी कम होने के कारण, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर होने वाली छोटी सी हलचल भी सीधे भारतीय रसोई तक पहुंच जाती है।

खाड़ी देशों का दबदबा

भारत का LPG आयात मुख्य रूप से कतर (34%), यूएई (26%) और सऊदी अरब (15%) जैसे देशों पर टिका है। ये देश मिलकर भारत की 90% से ज्यादा विदेशी सप्लाई पूरी करते हैं। वर्तमान में ये सभी देश युद्ध की भौगोलिक सीमा के करीब हैं। सप्लाई के लिए किसी एक खास क्षेत्र पर इतनी अधिक निर्भरता ने भारत को इस संकट के समय में काफी संवेदनशील स्थिति में डाल दिया है।

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LPG import from USA: अमेरिका बना नया रणनीतिक विकल्प

संकट की गंभीरता को देखते हुए भारत ने अब अमेरिका के साथ हाथ मिलाया है। सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने अमेरिकी गल्फ कोस्ट से सालाना 2.2 मिलियन टन LPG मंगाने का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किया है। जुलाई 2025 में भारतीय टीम ने अमेरिकी उत्पादकों के साथ सीधी डील की थी। सरकार की कोशिश है कि सप्लाई के लिए केवल खाड़ी देशों पर निर्भर न रहकर रूट में विविधता लाई जाए।

सरकारी सब्सिडी और बजट का बोझ

वैश्विक बाजार में गैस की कीमतें 60% से ज्यादा बढ़ने के बावजूद, सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए भारी सब्सिडी जारी रखी है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹1100 की लागत वाला सिलेंडर ₹500-550 में मिल रहा है। इस महंगाई को जनता से बचाने के लिए सरकार ने पिछले साल ₹40,000 करोड़ से ज्यादा खर्च किए हैं। हालांकि, युद्ध लंबा खिंचने पर यह वित्तीय बोझ सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।

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घरेलू उत्पादन के मुख्य स्तंभ

भारत की घरेलू एनर्जी का मुख्य आधार अरब सागर का ‘मुंबई हाई’ और बंगाल की खाड़ी का ‘KG बेसिन’ है। मुंबई हाई देश का सबसे बड़ा ऑफशोर गैस क्षेत्र है, जबकि KG बेसिन को भविष्य का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र माना जा रहा है। सरकार अब इन क्षेत्रों में ड्रिलिंग और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि भविष्य में विदेशी संकटों के समय देश को ऊर्जा के लिए दूसरों का मुंह न ताकना पड़े।



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