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oi-Sumit Jha
LPG Crisis India: दुनिया भर में गैस की किल्लतों के बीच भारत ने कई सालों के बाद ईरान से रसोई गैस (LPG) की पहली खेप खरीदी है। साल 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से ऊर्जा लेना बंद कर दिया था, लेकिन अब प्रतिबंधों में मिली कुछ ढील के बाद यह व्यापार फिर से शुरू होता दिख रहा है।
‘ऑरोरा’ नामक टैंकर, जो पहले चीन जा रहा था, अब ईरानी LPG लेकर भारत के मंगलौर बंदरगाह पहुंचने वाला है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण भारत को गैस सप्लाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

India Iran LPG Import: ईरान से सालों बाद गैस की वापसी
भारत और ईरान के बीच ऊर्जा का रिश्ता पुराना है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के कारण पिछले कुछ वर्षों से यह पूरी तरह ठप था। अब खबर आ रही है कि भारत ने एक ट्रेडर के जरिए ईरान से LPG की खेप खरीदी है और इसका भुगतान भारतीय रुपयों में किया जाएगा। हालांकि, सरकारी स्तर पर अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह सप्लाई नियमित होती है, तो इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक सस्ता और नजदीकी विकल्प मिल जाएगा।
Iran-India Energy Trade: तीन प्रमुख कंपनियों में होगा बंटवारा
ईरान से आ रही इस गैस की खेप को भारत की तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियों-इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)-के बीच बांटा जाएगा। ये कंपनियां देश में रसोई गैस की मुख्य सप्लायर हैं। सूत्रों का कहना है कि भारत आने वाले समय में ईरान से और भी खेप मंगवाने पर विचार कर रहा है। इससे न केवल गैस की किल्लत दूर होगी, बल्कि घरेलू बाजार में सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी, जो आम जनता के लिए राहत की बात है।
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भारत में गहराता गैस संकट
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीदार देश है, लेकिन फिलहाल यह गैस की भारी कमी से जूझ रहा है। पिछले साल देश में लगभग 33 मिलियन टन गैस की खपत हुई थी, जिसका 60% हिस्सा विदेशों से मंगवाया गया था। संकट इतना गहरा है कि सरकार को उद्योगों की गैस सप्लाई काटकर घरों तक रसोई गैस पहुंचानी पड़ रही है। इस किल्लत की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी तनाव है, जिसके कारण समुद्री रास्तों से माल लाने में काफी रुकावटें और देरी हो रही है।
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सप्लाई चेन सुधारने की कोशिशें
भारत अपनी गैस सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में फंसे भारतीय जहाजों, जैसे कि शिवालिक और नंदा देवी, को सुरक्षित निकालने का काम जारी है। भारत अब मिडिल ईस्ट के अन्य देशों के साथ-साथ ईरान जैसे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहा है ताकि विदेशी आयात पर निर्भरता के जोखिम को कम किया जा सके। फारस की खाड़ी में फंसे खाली जहाजों को भी भरकर वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।



