India
oi-Puja Yadav
LPG Gas Crisis: पश्चिम एशिया (Midlle East) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब भारतीय रसोई और अर्थव्यवस्था की दहलीज तक आ पहुंचा है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापारिक मार्गों के असुरक्षित होने से भारत में एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है।
इस संकट का प्रहार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत कई बड़े शहरों पर हुआ है, जहां कमर्शियल गैस की किल्लत के कारण 20% होटल और रेस्तरां बंद हो चुके हैं।

मुंबई के होटल और रेस्तरां एसोसिएशन (AHAR) ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो 50% से अधिक होटल बंद हो जाएंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ (आवश्यक वस्तु अधिनियम) लागू कर दिया है।
Hormuz Strait Crisis के बीच LPG का विकल्प ढूंढना क्यों आसान नहीं है?
तकनीकी रूप से एलपीजी कोई स्वतंत्र उत्पाद नहीं है, बल्कि यह कच्चे तेल के शोधन (Refining) के दौरान निकलने वाला एक ‘सह-उत्पाद’ (Byproduct) है। पहले रिफाइनरियों में कच्चे तेल को 350-400°C तक गर्म किया जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान डिस्टिलेशन कॉलम में सबसे ऊपर की ओर प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) गैसें निकलती हैं, जिन्हें मिलाकर LPG बनती है।
बता दें कि, भारत अपनी रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल पर निर्भर है और वह तेल ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए आता है, इसलिए तेल की कमी सीधे गैस के उत्पादन को गिरा देती है। अगर हॉर्मुज बंद होने से कच्चा तेल कम आएगा, तो रिफाइनरियों का ‘थ्रूपुट’ यानि उत्पादन क्षमता गिर जाएगा।

इससे पेट्रोल-डीजल तो कम बनेगा ही, साथ ही LPG का उत्पादन अपने आप ही गिर जाएगा। यही वजह है कि सरकार ने रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे अन्य औद्योगिक उपयोग छोड़कर केवल रसोई गैस बनाएं।
क्यों ‘हॉर्मुज’ का बंद होना भारत के लिए ‘ब्लैकआउट’ जैसा है?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भारत की लाइफलाइन और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है। यह जलमार्ग इतना संकरा है कि इसके सबसे पतले हिस्से की चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर है। ईरान इस पर भौगोलिक रूप से हावी है।
भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और 50% से ज्यादा गैस आयात करता है। इसमें से आधा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। यदि ईरान इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक करता है या युद्ध के कारण बीमा कंपनियां टैंकरों को कवर देना बंद कर देती हैं, तो भारत की रिफाइनरियों को कच्चा तेल मिलना बंद हो जाएगा।
कतर (Qatar) पर ड्रोन हमले से भारत में ‘LNG’ की कमर टूटी
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजरायल की स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में स्थित ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इसके चलते भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी (LNG) प्लांट का उत्पादन रोक दिया है। भारत घरों में जो पाइप वाली गैस (PNG) और गाड़ियों में CNG इस्तेमाल करता है, वह मुख्य रूप से LNG (Liquefied Natural Gas) है।
इस पर कतर का एकाधिकार है। भारत अपनी LNG जरूरत का 40% हिस्सा अकेले कतर से लेता है। ईरान के हमलों के कारण कतर के ‘नॉर्थ फील्ड’ जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है वहां से सप्लाई रुकना भारत के फर्टिलाइजर (खाद) और बिजली संयंत्रों को ठप कर सकता है। इससे न सिर्फ खाना महंगा होगा, बल्कि बिजली संकट भी पैदा हो सकता है।
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (ECA) 1955 ही सरकार का एकमात्र ‘ब्रह्मास्त्र’
सरकार ने ECA को लागू कर यह साफ कर दिया है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है। अब कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर या व्यापारी गैस सिलेंडरों को स्टोर नहीं कर पाएगा। सरकार अब खुद तय करेगी कि किस सेक्टर (जैसे घरेलू बनाम कमर्शियल) को कितनी गैस मिलेगी। होटलों की सप्लाई काटना इसी रणनीति का हिस्सा है ताकि आम जनता के घर का चूल्हा न बुझे।
जब कमर्शियल गैस की सप्लाई रुकती है, तो होटल और रेस्तरां बंद होते हैं। जो खुले रहते हैं, वे खाने की कीमतें 30-40% तक बढ़ा देते हैं। भारत एक ‘एनर्जी इंपोर्टर’ देश है। जब भी तेल-गैस की सप्लाई रुकती है, भारतीय रुपया (INR) गिरता है और शेयर बाजार में भारी गिरावट आती है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार खोलने पर चर्चा कर रहे हैं। भारत को उम्मीद है कि रूस और अल्जीरिया से अतिरिक्त कच्चा तेल आने पर संकट कुछ कम हो सकता है। हालांकि, जब तक मध्य पूर्व में युद्ध शांत नहीं होता, तब तक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।
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