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LPG Gas Cylinder Price Hike: भारत में अब सिलेंडर ₹1500 का हो गया? वाकई ईरान युद्ध ने गैस की कीमतें बढ़ाईं?


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oi-Divyansh Rastogi

LPG Gas Cylinder Price Hike Update: मार्च 2026 में भारत के घरों में खाना पकाने की गैस (एलपीजी) को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मची।

सोशल मीडिया पर वीडियो और खबरें वायरल हो रही हैं, जहां लोग लंबी कतारों में खड़े दिख रहे हैं, और कुछ जगहों पर काला बाजार में सिलेंडर 1,500 रुपये तक बिकने की बातें हो रही हैं। लेकिन क्या वाकई देश में एलपीजी की भारी कमी है? आइए पूरी स्थिति समझते हैं…

LPG Gas Cylinder Price Hike Update

LPG Gas Price Hike: कीमतों में बढ़ोतरी- कितनी और क्यों?

7 मार्च 2026 से सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने घरेलू (नॉन-सब्सिडाइज्ड) 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की। दिल्ली में अब यह 913 रुपये का हो गया है (पहले 853 रुपये था)। अन्य शहरों में भी समान वृद्धि:

  • कोलकाता: 939 रुपये
  • मुंबई: 912.50 रुपये
  • चेन्नई: 928.50 रुपये

वाणिज्यिक (19 किलो) सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये (कुछ रिपोर्टों में 114.50) की बढ़ोतरी हुई, दिल्ली में अब 1,883 रुपये। यह घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लगभग एक साल में पहली बड़ी बढ़ोतरी है।

यह बढ़ोतरी ईरान युद्ध के कारण वैश्विक एलपीजी और क्रूड ऑयल कीमतों में उछाल से आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत की लगभग 80-90% एलपीजी आयात होती है, जो खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब, कुवैत) से आती है। युद्ध ने इस रूट को बाधित किया, फ्रेट और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़े, और ग्लोबल स्पॉट प्राइस में तेजी आई। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है, और आयात पर 60-65% निर्भर है।

क्या वाकई कमी है? घबराहट vs हकीकत

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगीं। इसमें नोएडा, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, कोलकाता, हैदराबाद, रांची शामिल है। वायरल वीडियो में सैकड़ों लोग सिलेंडर लेकर बैठे दिखे। कुछ जगहों पर काला बाजार में 1,500 रुपये तक कीमत बताई गई, खासकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में। लेकिन सरकार और विशेषज्ञों का कहना साफ है-देशव्यापी कमी नहीं है।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 6 मार्च को कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं। हमारी प्राथमिकता किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 25-30 दिनों की मांग के लिए पर्याप्त स्टॉक और रणनीतिक भंडार हैं। रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ रहा है (2026 के लिए 2.2 मिलियन टन का कॉन्ट्रैक्ट)। अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे से वैकल्पिक स्रोत तलाशे जा रहे हैं। इंडियन ऑयल ने सोशल मीडिया पर अफवाहों को खारिज किया-स्टॉक पर्याप्त, सप्लाई नॉर्मल।

घबराहट के पीछे क्या कारण?

  • पैनिक बाइंग: युद्ध की खबरों से लोग एहतियातन ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं, जिससे लोकल लेवल पर दबाव बढ़ा।
  • बुकिंग नियम सख्त: जमाखोरी रोकने के लिए नई बुकिंग की वेटिंग पीरियड बढ़ाई गई-सिंगल सिलेंडर वाले के लिए 21-25 दिन, डबल के लिए 30 दिन। इससे पहले बुकिंग करने की होड़ मची।

कालाबाजारी: कुछ डीलरों ने संकट का फायदा उठाया, 1,500 रुपये तक चार्ज किए। लेकिन कुल सप्लाई स्थिर है।
वाणिज्यिक प्रभाव: होटल, रेस्तरां, फैक्टरियां (जैसे सिरेमिक इंडस्ट्री में 94 रुपये/किलो तक पहुंची), और यहां तक कि पुणे के श्मशान घाट में गैस आधारित अंतिम संस्कार अस्थायी रूप से रोके गए (घरेलू को प्राथमिकता देने के कारण)।

क्या होगा आगे?

युद्ध लंबा खिंचा तो आयात बिल बढ़ेगा, सब्सिडी पर दबाव आएगा, और कीमतें और बढ़ सकती हैं। लेकिन सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल कर रिफाइनरियों को प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। वैकल्पिक रूट्स और US से आयात से स्थिति संभालने की कोशिश है।

1,500 रुपये वाला सिलेंडर काला बाजार की अफवाह/स्थानीय गड़बड़ी है, न कि ऑफिशियल रेट। आधिकारिक कीमत दिल्ली में 913 रुपये है। घबराहट से बचें, ऑनलाइन/ऐप से बुकिंग करें, और अफवाहों पर यकीन न करें। सरकार का दावा है-सप्लाई सुरक्षित है, बस पैनिक न फैलाएं। यह स्थिति वैश्विक संकट और लोकल व्यवहार का मिश्रण है, लेकिन पूर्ण संकट नहीं।



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