भारत के शेयर बाजार में नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार में तेज गिरावट दर्ज की गई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में केवल 13.3 लाख नए निवेशक जुड़े, जो महीने-दर-महीने आधार पर 24.5% की गिरावट है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट भी है और पिछले करीब 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है।
बाजार में दीर्घकालिक भागीदारी मजबूत बनी हुई है
फरवरी 2026 तक एनएसई का कुल रजिस्टर्ड निवेशक आधार बढ़कर 12.8 करोड़ हो गया है। हालांकि, नए निवेशकों की संख्या में कमी के बावजूद बाजार में दीर्घकालिक भागीदारी मजबूत बनी हुई है। 12 फरवरी 2026 को यूनिक क्लाइंट कोड्स की संख्या 25 करोड़ के पार पहुंच गई, जो इक्विटी बाजार में लगातार बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
वार्षिक आधार पर निवेशकों की भागीदारी स्थिर रही
साल-दर-साल आधार पर निवेशकों की वृद्धि दर पिछले तीन महीनों में 14.4% पर स्थिर रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अल्पकालिक सुस्ती के बावजूद लंबी अवधि का रुझान सकारात्मक बना हुआ है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक जुड़े, जो पिछले साल इसी अवधि के 18.2 लाख के मुकाबले कम है। इससे स्पष्ट है कि नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार धीरे-धीरे ठंडी पड़ रही है।
महाराष्ट्र सबसे ज्यादा निवेशकों वाला राज्य बना
क्षेत्रीय स्तर पर महाराष्ट्र दो करोड़ से अधिक निवेशकों वाला पहला राज्य बन गया है और कुल निवेशक आधार में 15.7% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। हालांकि, वित्त वर्ष 2021 में इसका हिस्सा 19.5% था, जो अब घटा है। इससे संकेत मिलता है कि अन्य राज्यों में निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत शीर्ष पांच राज्यों की हिस्सेदारी कुल निवेशक आधार में 48% है। वहीं, शीर्ष 10 राज्यों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015 के लगभग 78% से घटकर FY26 में 73.1% रह गई है, जो निवेशकों के भौगोलिक विस्तार को दर्शाता है।



