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Middle East Tension: जंग की वजह से ‘इंटरनेट संकट’, लाल सागर में केबल कटने से थमेगी दुनिया की रफ्तार!


International

oi-Smita Mugdha

Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत एक संकट से उबर ही रहा था कि अब एक नई चिंता सामने आ गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही में कुछ राहत मिली है। हालांकि, इसके बावजूद दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें और जंग की वजह से विमानों का परिचालन प्रभावित हो रहा है।

अब इंटरनेट कनेक्शन प्रभावित होने की आशंका है और इससे दुनिया की रफ्तार थम सकती है। अब लाल सागर (Red Sea) में बढ़ता खतरा इंटरनेट सेवाओं पर बड़ा असर डाल सकता है। दरअसल, ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव के चलते यमन के हूती विद्रोही भी सक्रिय हो गए हैं।

Middle East Tension

Middle East War: हूती विद्रोहियों ने दी केबल काटने की धमकी

इन विद्रोहियों की ओर से सोशल मीडिया पर लाल सागर के नीचे बिछे फाइबर ऑप्टिक केबल को निशाना बनाने की धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि, ईरान की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन हालात को देखते हुए आशंकाएं बढ़ गई हैं।

Red Sea Cable Connection: लाल सागर के केबल कनेक्शन होंगे प्रभावित

– लाल सागर के भीतर से गुजरने वाले ये समुद्री केबल वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ माने जाते हैं। दुनिया का करीब 95% अंतर्राष्ट्रीय डेटा इन्हीं केबलों के जरिए ट्रांसफर होता है।

– इनमें क्लाउड सर्विस, वीडियो कॉल, ईमेल, डिजिटल पेमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं। अगर केबल काटे जाते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। आज इंटरनेट के बिना कोई काम करना संभव नहीं है।

Middle East Tension: पहले भी केबल किए गए हैं प्रभावित

ऐसा पहली बार नहीं है जब इन केबलों पर खतरा मंडराया हो। सितंबर 2025 में भी समुद्र के नीचे बिछे कई केबल क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के कई देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हुई थी। उस समय इंटरनेशनल केबल प्रोटेक्शन कमिटी ने बताया था कि चार प्रमुख केबल यूरोप इंडिया गेटवे, दक्षिण पूर्व एशिया-मध्य पूर्व-पश्चिम यूरोप, भारत-मध्य पूर्व-पश्चिम यूरोप और फाल्कन जीसीएक्स को नुकसान पहुंचा था।

Internet Connectivity से बुरी तरह प्रभावित होगा भारत

अगर मौजूदा हालात में लाल सागर में कोई बड़ा नुकसान होता है, तो भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। भारत में मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, तूतीकोरिन और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में 14 लैंडिंग स्टेशनों से जुड़े करीब 17 अंतरराष्ट्रीय केबल हैं। इन केबलों के जरिए देश की इंटरनेट और डिजिटल सेवाएं संचालित होती हैं। अगर इन समुद्री केबलों को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो भारत में इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं में बाधा आ सकती है, और बड़े स्तर पर नेटवर्क आउटेज भी देखने को मिल सकता है।

लाल सागर में बढ़ता तनाव केवल एक क्षेत्रीय संकट नहीं, बल्कि वैश्विक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।



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