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oi-Siddharth Purohit
Middle East War: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को तीन हफ्ते हो चुके हैं और अब Saudi Arabia की राजधानी Riyadh को Iran ने बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है। इस हमले के बाद सऊदी अरब ने संकेत दिया है कि वह अब अपनी संयम की नीति छोड़ सकता है और सीधे युद्ध में उतर सकता है। दूसरी तरफ, अब पाकिस्तान पर भी इस जंग में उतरने का दबाव बन रहा है। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद पाकिस्तान ने सऊदी के साथ करार किया था अगर दोनों में से किसी देश पर हमला होता है, तो उसका जवाब दोनों देश मिलकर देंगे। लेकिन पाकिस्तान ईरान का भी समर्थक है, इसलिए अब वह इस जंग में बुरा फंसता दिख रहा है।
हाई-लेवल मीटिंग के दौरान हुआ हमला
यह हमला उस समय हुआ जब Turkey, United Arab Emirates, Jordan, Qatar और Syria समेत लगभग एक दर्जन देशों के विदेश मंत्री रियाद के एक होटल में बैठक कर रहे थे। उसी समय राजधानी रियाद को ईरानी मिसाइलों से निशाना बनाया। इससे साफ है कि युद्ध अब एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है।

पाकिस्तान की एंट्री और न्यूक्लियर खतरा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर सऊदी अरब युद्ध में उतरता है, तो वह पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा समझौते को सक्रिय कर सकता है। इससे इस्लामाबाद भी इस युद्ध में शामिल हो सकता है, और यही स्थिति इस जंग को न्यूक्लियर स्तर तक ले जा सकती है। क्योंकि पाकिस्तान ईरान के साथ जमीनी बॉर्डर साझा करता है इससे दोनों देशों में जमीन के रास्ते भी टकराव होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने United States से ईरान पर हमले जारी रखने की अपील की है।
जंग में उतरने से घबरा रहे शहबाज-मुनीर
इस बीच पाकिस्तान ने खुद को इस युद्ध से दूर रखने की कोशिश की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने अफगानिस्तान पर हमला कर अपना फोकस दूसरी ओर मोड़ दिया, ताकि वह सीधे इस जंग में न घिरे। साथ ही पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ दोनों को इस बात का डर सता रहा है कि अगर वह ईरान के खिलाफ कुछ भी करते हैं तो फिर उसके ड्रोन सीधा इस्लामाबाद और रावलपिंडी को निशाना बना सकते हैं।
“टर्निंग पॉइंट है रियाद पर हमला”
इंटरनेशनल मामलों के जानकार मारियो नौफाल ने रियाद पर हमले को “टर्निंग पॉइंट” बताया है। उनका कहना है कि यह हमला समय, टारगेट और पैमाने के हिसाब से पूरी तरह प्लान किया गया था। वहीं इस हमले पर सऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan ने कहा कि उनका सब्र असीमित नहीं है। अगर हमले जारी रहते हैं, तो सऊदी अरब भी सैन्य कार्रवाई करेगा।
ईरान के साथ भरोसा टूट चुका
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ भरोसा अब लगभग खत्म हो चुका है। अगर हमले नहीं रुके, तो संबंधों को फिर से सुधारना मुश्किल होगा। पिछले तीन हफ्तों से यह युद्ध अमेरिका-इजरायल के हमलों और ईरान के जवाबी हमलों के इर्द-गिर्द घूम रहा था। ईरान पहले ही UAE, Bahrain, Kuwait और Qatar को निशाना बना चुका था, लेकिन सऊदी अरब अब तक सीधे हमलों से बचा हुआ था।
सऊदी की रिफाइनरी पर क्यों किया हमला?
ईरान ने रियाद की एक बड़ी रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जो शहर की ईंधन जरूरतों को पूरा करती है। इससे दूसरे देशों में भेजे जाने वाली और सऊदी के इस्तेमाल में लाई जाने वाली तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। बता दें कि ये रियाद पर हुआ पहला हमला था, जिसके बाद वहां पैनिक जैसी स्थिति बन गई।
पाकिस्तान बुरा फंसा
अगर सऊदी अरब युद्ध में उतरता है, तो पाकिस्तान भी इसमें शामिल हो सकता है और इससे पाकिस्तान के लिए वॉर का एक और फ्रंट खुल जाएगा। पाकिस्तान पहले से ही एक जंग तालिबान के साथ लड़ रहा है। ऐसे में उसके लिए एक साथ दो जंग लड़ना बहुत मुश्किल हो जाएगा। अब देखना होगा कि रियाद इस पर कैसे रिएक्ट करता हैं।
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