सरकार ने 300 करोड़ रुपये तक की लागत वाली राजमार्ग परियोजनाओं के लिए 12 महीने और 301 से 500 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए 18 महीने की आधार निर्माण अवधि निर्धारित की है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने सोमवार बताया कि मैदानी और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आधार निर्माण अवधि कुल सिविल लागत के आधार पर होनी चाहिए, क्योंकि वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर मौजूदा दिशानिर्देशों में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही थी।
दूसरी ओर सरकार की ओर से 501-1,500 करोड़ रुपये की कुल सिविल लागत वाली राजमार्ग परियोजना के मामले में, आधार निर्माण अवधि 24 महीने तय की गई है।। मंत्रालय ने एक परिपत्र ने कहा कि परियोजना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए (जैसे कि कई आरओबी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर की लंबाई या सुरंग की लंबाई), आधार निर्माण अवधि को बढ़ाया जाना चाहिए।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि भूभाग की कठिनाई से संबंधित निर्माण कटाई और ढलान स्थिरीकरण की भरपाई के लिए उन्नत आधार निर्माण अवधि में अतिरिक्त 12 महीने जोड़े जाने चाहिए। ये मानक निर्माण अवधियां 6 मई, 2026 को या उसके बाद इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएम), या बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मोड पर बोली लगाने वाली सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होंगी।
हाईवे निर्माण परियोजनाओं से जुड़ा यह नियम हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू को छोड़कर जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम, दार्जिलिंग की पहाड़ियों, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और मेघालय जैसे हिमालयी/पूर्वोत्तर राज्यों के पहाड़ी/पर्वतीय दुर्गम इलाकों में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगा।
सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने वाले सलाहकार को एक यथार्थवादी नजरिए से निर्माण की अवधि का अनुमान भी लगाना होगा। पहले, मानक ईपीसी अनुबंध दस्तावेज में समयसीमा निर्धारित रहती थी, इसके तहत 50 किलोमीटर से अधिक लंबाई के हाइवे और 200 मीटर से कम लंबाई के एक बड़े पुल का निर्माण 24-30 महीनों में पूरा करना जरूरी था।



