Bhopal
oi-Laxminarayan Malviya
MP News Gwalior High Court: मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर! ग्वालियर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का 2024 उपचुनाव शून्य घोषित कर दिया है।
जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने सोमवार को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें मुकेश मल्होत्रा को नामांकन पत्र में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने का दोषी पाया गया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया में गंभीर उल्लंघन है, जिसके कारण उनका निर्वाचन अमान्य है।

इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने उपचुनाव में दूसरे स्थान पर रहे बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री रामनिवास रावत को विजयपुर से विधायक घोषित कर दिया है। यह फैसला रामनिवास रावत द्वारा दायर चुनाव याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने मुकेश मल्होत्रा पर झूठा हलफनामा दाखिल करने का आरोप लगाया था।
विवाद की जड़: नामांकन में छिपाए गए 6 आपराधिक मामले
रामनिवास रावत की याचिका के अनुसार, मुकेश मल्होत्रा ने 13 नवंबर 2024 को हुए विजयपुर उपचुनाव में नामांकन दाखिल करते समय फॉर्म 26 (हलफनामा) में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी। याचिका में दावा किया गया कि मल्होत्रा पर कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उन्होंने हलफनामे में केवल दो मामलों का ही उल्लेख किया। बाकी चार मामलों को जानबूझकर छिपाया गया, जो चुनाव आयोग के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (जैसे प्यूब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) में स्पष्ट है कि उम्मीदवार को अपने सभी आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा करना अनिवार्य है। छिपाने पर चुनाव अमान्य हो सकता है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद इस आधार पर मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया।
चुनाव का पृष्ठभूमि और परिणाम
विजयपुर उपचुनाव नवंबर 2024 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने बीजेपी के रामनिवास रावत को 7,364 वोटों से हराया था। मुकेश मल्होत्रा (42 वर्ष) साहरीया आदिवासी समुदाय से हैं और पहले बीजेपी में थे, लेकिन उपचुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे। रामनिवास रावत (छह बार के विधायक और तीन बार मंत्री) विजयपुर से लंबे समय से प्रभावशाली रहे हैं। वे कांग्रेस से बीजेपी में आए थे और उपचुनाव में हार गए थे।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई 2025 से चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी मल्होत्रा की याचिका खारिज की थी, जिससे मामला हाईकोर्ट में मजबूत हुआ।
कोर्ट की टिप्पणियां और प्रभाव
जस्टिस अहलूवालिया ने फैसले में कहा कि उम्मीदवार द्वारा आपराधिक रिकॉर्ड छिपाना लोकतंत्र की पारदर्शिता पर हमला है। मतदातकों को सही जानकारी का हक है। कोर्ट ने मल्होत्रा के वकील के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी थी, वकील पर दोष डालना उचित नहीं।
इस फैसले से:
मुकेश मल्होत्रा की विधायकी तत्काल समाप्त हो गई।
उपचुनाव की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि कोर्ट ने रावत को विजेता घोषित किया। कांग्रेस को विधानसभा में एक सीट का नुकसान हुआ, जबकि बीजेपी को मजबूती मिली। यह फैसला अन्य चुनावी मामलों में हलफनामे की सत्यता पर सख्त संदेश देता है।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
रामनिवास रावत ने फैसले का स्वागत किया और कहा, “न्याय हुआ है। लोकतंत्र में सच्चाई की जीत हुई।” मुकेश मल्होत्रा की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने इस पर अलग-अलग बयान दिए हैं। कांग्रेस इसे “राजनीतिक साजिश” बता रही है, जबकि बीजेपी “न्याय की जीत” कह रही है।
यह फैसला मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, खासकर विंध्य और चंबल क्षेत्र में जहां विजयपुर सीट महत्वपूर्ण है। अब देखना है कि क्या मुकेश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट जाते हैं या नई रणनीति अपनाते हैं।



