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MSME: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना में बदलाव, मशीनरी की लागत पर अब 75 नहीं 60% का कैप


वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी योजना में बदलाव का एलान किया है। यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए है। यह संशोधन विनिर्माताओं और निर्यातकों को समर्थन देने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित योजना में चौथे वर्ष के बाद किस्तों में पांच फीसदी अग्रिम योगदान की अनुमति है। एनसीजीटीसी ने 24 फरवरी, 2026 से इस योजना को लागू कर दिया है।

संशोधित योजना में सेवा क्षेत्र को भी शामिल किया गया है। उपकरण या मशीनरी की लागत को परियोजना लागत के 75 फीसदी से घटाया गया है। अब यह 60 फीसदी कर दी गई है। पहले यह सीमा 75 फीसदी थी। नई योजना के अनुसार, ऋण गारंटी 10 साल बाद समाप्त हो जाएगी। पुरानी योजना में इसकी कोई निश्चित अवधि नहीं थी। योजना का उद्देश्य एमएसएमई को संयंत्र और मशीनरी/उपकरण खरीदने के लिए ऋण उपलब्ध कराना है। इससे भारत के विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में सहायक होगा।

पात्रता और ऋण सीमा के बारे में क्या अपडेट?

इस योजना का लाभ उन लाभदायक इकाइयों को मिलेगा। जिन्होंने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अपने बिक्री कारोबार का कम से कम 25 फीसदी निर्यात किया है। उन्हें कुछ निर्यात प्राप्ति शर्तों को भी पूरा करना होगा। गारंटीकृत ऋण राशि 20 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अग्रिम योगदान ऋण राशि का दो फीसदी होगा। यह अधिकतम 40 लाख रुपये तक हो सकता है। गारंटी अवधि के चौथे और पांचवें वर्ष में एक-एक फीसदी राशि वापसी योग्य होगी।

गारंटी कवरेज के बारे में क्या कहा गया?

गारंटी कवरेज चूक की राशि का 75 फीसदी होगा। पहले वर्ष के लिए गारंटी शुल्क ‘शून्य’ रहेगा। उसके बाद हर साल बकाया ऋण का 0.50 फीसदी शुल्क लिया जाएगा। यह योजना जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। इसके तहत सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) को ऋण सुविधाएं मिलती हैं। 100 करोड़ रुपये तक की इन सुविधाओं के लिए गारंटी कवरेज मिलता है। यह कवरेज 60 फीसदी तक प्रदान किया जाता है।

देश की जीडीपी में एमएसएमई का कितना योगदान?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 फीसदी का योगदान करते हैं। ये देश के कुल निर्यात में 45 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। एमएसएमई 35 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार भी प्रदान करते हैं। इन संशोधनों से निर्यातक एमएसएमई सहित सभी एमएसएमई के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ेगी। यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।





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