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Munir Dress Diplomacy: ईरान से वर्दी, तो अमेरिका से सूट में क्यों मिले मुनीर? क्या है बार-बार ड्रेस बदलने की व


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oi-Siddharth Purohit

Munir Dress Diplomacy: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है। यहां अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बाद क्षेत्र में शांति स्थापित करने को लेकर बातचीत चल रही हैं। लेकिन इस बार चर्चा किसी बड़ी डील की नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir की ड्रेस स्टाइल की हो रही है। दरअसल उन्होंने ईरान और अमेरिका दोनों के डेलिगेट्स को अलग-अलग ड्रेस में रनवे पर रिसीव किया। जिसके बाद इस बात पर कई लोगों का ध्यान गया। आइए जानते हैं इसका क्या मतलब है।

एक दिन, दो लुक, लेकिन क्यों?

जनरल असीम मुनीर ने एक ही दिन में दो अलग-अलग तरह की ड्रेस पहनकर सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। पहले वे पूरी तरह मिलिट्री कॉम्बैट यूनिफॉर्म में नजर आए, और कुछ ही घंटों बाद वे एक फॉर्मल ब्लैक सूट में दिखे। इस बदलाव ने एक्सपर्ट्स को सोचने पर मजबूर कर दिया कि इसके पीछे कोई खास मैसेज छिपा है।

Munir Dress Diplomacy

ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में कॉम्बैट लुक

जब 70 सदस्यीय ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंचा, तब जनरल मुनीर ने उनसे मिलिट्री कॉम्बैट यूनिफॉर्म में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खुद को एक सख्त और अलर्ट सैन्य कमांडर के रूप में पेश किया, जो हर स्थिति के लिए तैयार है। इस दौरान उनके हाथ में एक छड़ी भी थी, जो आर्मी में उनके ओहदे को दिखा रही थी।

आज पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता होगी

ईरान के नेता पाकिस्तान पहुंच चुके है-

-मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़: संसद के अध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख।
-अब्बास अराघची: विदेश मंत्री।
-अली अकबर अहमदीन: सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (या रक्षा परिषद) के सचिव।… pic.twitter.com/ERsdpAA84q

— Narendra Pratap (@hindipatrakar) April 11, 2026 “>

जेडी वेंस के स्वागत में बदले कपड़े

कुछ ही समय बाद, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance का विमान एयरबेस पर उतरा, तो जनरल मुनीर का पूरा लुक बदल चुका था। इस बार वे एक फॉर्मल ब्लैक सूट में नजर आए, जो एक डिप्लोमैटिक और राजनीतिक छवि को दिखाता है।

NEW: VP JD Vance has landed in Pakistan for negotiations. He was received by senior Pakistani officials and Field Marshal General Asim Munir. pic.twitter.com/TNphRDEZ9w

— Levent Kemal (@leventkemaI) April 11, 2026 “>

“ड्रेस डिप्लोमेसी” का क्या मतलब?

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह “ड्रेस डिप्लोमेसी” थी, यानी कपड़ों के जरिए मैसेज देना। यह एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसमें अलग-अलग देशों को अलग-अलग संकेत दिए गए। इसमें ईरानी प्रतिनिधिमंडल से कॉम्बैट यूनिफॉर्म में मिलकर मुनीर ने साफ संकेत दिया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। खासतौर पर 2024 में पाकिस्तान और ईरान के बीच हुए मिसाइल हमलों के बाद यह एक मजबूत संदेश था कि पाकिस्तान हर स्थिति के लिए तैयार है।

अमेरिका को डिप्लोमैटिक संकेत

वहीं JD Vance के सामने सूट पहनकर मुनीर ने खुद को एक राजनेता और डिप्लोमैटिक लीडर के रूप में पेश किया। इसका मकसद अमेरिका के साथ रिश्तों को मजबूत दिखाना और बातचीत को सहज बनाना था। यह पहली बार नहीं है जब जनरल मुनीर ने ऐसा किया हो। इससे पहले भी वे Donald Trump से मुलाकात के दौरान सूट पहन चुके हैं। उस समय भी उन्होंने खुद को एक मॉडर्न और इंटरनेशनल लीडर के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।

पाकिस्तान के अंदरूनी पावर का संकेत

यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संदेश नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के अंदर की राजनीति का भी संकेत था। पाकिस्तान में सेना का प्रभाव पहले से ही मजबूत माना जाता है, और मुनीर ने यह दिखाने की कोशिश की कि असली ताकत उन्हीं के पास है।

रेड कार्पेट पर दिखी ताकत

JD Vance के साथ उनकी मुस्कुराते हुए रेड कार्पेट पर बातचीत इस बात का संकेत थी कि पाकिस्तान में बड़े फैसले आखिरकार सेना के हाथ में ही होते हैं न कि प्रधानमंत्री के पास। यहां तक कि पाकिस्तान में पीस टॉक को लेकर लगे ज्यादातर पोस्टर में आसिम मुनीर को ही आगे दिखाया गया है।

सूट को लेकर पिनक चुका है अमेरिका

याद होगा जब डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को बातचीत करने बुलाया था तब जेडी वेंस और ट्रंप की जेलेंस्की से कपड़ों को लेकर भी बहस हो गई थी। उस दौरान जेलेंस्की एक जैकेट में पहुंचे थे, जिस पर जेडी वेंस और ट्रंप भड़क गए थे। शायद ये डर भी एक कारण हो सकता है कि मुनीर उनसे सूट-बूट में मिले।

कुल मिलाकर क्या समझें?

इस्लामाबाद में जहां फोकस अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर होना चाहिए था, वहां जनरल असीम मुनीर ने अपनी रणनीतिक “ड्रेस डिप्लोमेसी” से पूरी लाइमलाइट ले ली। उन्होंने साफ संकेत दिया कि पाकिस्तान में सिर्फ कूटनीति ही नहीं, बल्कि असली पावर भी सेना के हाथों में है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।





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